
अल्मोड़ा। उम्र के उस पड़ाव पर जब मां को सहारे के लिए बेटी की जरूरत थी, बेटी ही मां का सहारा बनी हुई थी। चार दशक से दोनों की दुनिया एक-दूसरे तक सिमटी थी। 95 वर्षीय धनुली देवी की आंखों की रोशनी भले धुंधली पड़ गई थी, कदम लड़खड़ाने लगे थे, लेकिन बेटी तुलसी देवी हर दिन उनके साथ खड़ी थी। सुबह की पूजा से लेकर घर के छोटे-बड़े काम तक, मां की देखभाल तुलसी की जिंदगी का हिस्सा बन चुकी थी। शनिवार की सुबह भी सब कुछ रोज जैसा ही था। लेकिन कुछ ही देर बाद रतखेत गांव में एक ऐसी घटना हुई, जिसने मां-बेटी की इस लंबी कहानी का अंत कर दिया।
विकासखंड स्याल्दे के बसई गांव के रतखेत तोक में शनिवार सुबह करीब साढ़े नौ बजे 66 वर्षीय तुलसी देवी घर में पूजा-पाठ कर रही थीं। पड़ोस में रहने वाला 70 वर्षीय राजे सिंह अपने खेत में काम करने पहुंचा था। किसी बात को लेकर दोनों के बीच कहासुनी हुई। आरोप है कि राजे सिंह ने दराती और पत्थरों से तुलसी देवी पर हमला कर दिया। गंभीर रूप से घायल तुलसी को ग्रामीण सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र स्याल्दे ले गए, लेकिन चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
चीख-पुकार सुनकर 95 वर्षीय धनुली देवी बेटी को बचाने के लिए आगे बढ़ीं। उम्र ने शरीर को कमजोर कर दिया था, लेकिन बेटी को बचाने की ममता ने उन्हें घर से बाहर खींच लिया। पुलिस के अनुसार, आरोपी ने उन पर भी दराती के पिछले हिस्से से वार किया, जिससे वह घायल हो गईं।
पति लाया सौतन तो मां के पास लौटी थीं तुलसी
तुलसी देवी का जीवन पहले भी आसान नहीं रहा था। मूल रूप से नैहलगैर ग्राम सभा घुगती की रहने वाली तुलसी का विवाह मोहन चंद्र से हुआ था। संतान नहीं होने के बाद पति ने दूसरी शादी कर ली। इसके बाद तुलसी ने ससुराल छोड़ दिया और करीब चार दशक पहले अपने मायके रतखेत लौट आईं।
भाई अपने-अपने परिवार में अलग हो गए तो तुलसी अपनी 95 वर्षीय मां के साथ रहने लगीं। घर चलाने के लिए मेहनत-मजदूरी की। पुलिस के अनुसार आरोपी राजे सिंह घटना के बाद फरार है और उसकी तलाश में दबिश दी जा रही है।




