केबीसी के ऑनलाइन खेल में 8.5 लाख के हर सही जवाब का लालच, टैक्स के नाम पर 1.50 करोड़ साफ

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बड़े इनाम की उम्मीद में शुरू हुआ एक ऑनलाइन खेल रुद्रप्रयाग के अध्यापक के लिए 1.50 करोड़ रुपये की ठगी में बदल गया। फेसबुक पर कौन बनेगा करोड़पति के नाम से चल रही चेहरा पहचानो प्रतियोगिता में सही जवाब देने पर हर बार 8.5 लाख रुपये देने का लालच दिया गया। जब अध्यापक ने इनाम की रकम मांगी तो साइबर ठगों ने ऐसा जाल बुना कि वह पांच महीने तक रकम भेजते रहे। कभी कर, कभी शुल्क और कभी दूसरी औपचारिकताओं के नाम पर उनसे 50 से अधिक बार लेनदेन कराया गया। सितंबर तक विभिन्न खातों में करीब 1.50 करोड़ रुपये पहुंच गए, लेकिन इनाम की रकम फिर भी नहीं मिली।

पुलिस को दी शिकायत के मुताबिक रुद्रप्रयाग निवासी विमल सिंह ने 14 जनवरी 2026 को फेसबुक पर केबीसी के नाम से चल रही ऑनलाइन प्रतियोगिता में हिस्सा लिया था। प्रतियोगिता में उन्हें अलग-अलग लोगों की तस्वीरें दिखाकर पहचानने को कहा गया। मुकेश अंबानी, अमिताभ बच्चन और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की तस्वीरें भी दिखाई गईं। सही पहचान बताने पर उन्हें बड़ी रकम जीतने का भरोसा दिया गया।

इसके बाद नितिन नाम के व्यक्ति ने उनसे संपर्क किया और कहा कि जीती हुई रकम पाने के लिए पहले कर जमा करना होगा। ठगों ने कथित तौर पर आरबीआई के दस्तावेज भेजकर उन्हें विश्वास दिलाया कि उनके नाम करोड़ों रुपये की राशि स्वीकृत है। इसके बाद शुरू हुआ भुगतान का सिलसिला। कभी कर तो कभी किसी अन्य शुल्क के नाम पर रकम मांगी जाती रही। अध्यापक हर भुगतान के बाद इस उम्मीद में पैसे भेजते रहे कि अब पुरस्कार की रकम उनके खाते में आ जाएगी।

ठगों ने भरोसा बढ़ाने के लिए कार जीतने का भी झांसा दिया। 30 मार्च से उनसे लगातार रकम मंगाई जाने लगी। कुछ पैसे उन्होंने अपने खातों से भेजे तो कुछ परिचितों से उधार लेकर जमा किए। करीब पांच महीने में 50 से अधिक लेनदेन के जरिए 1.50 करोड़ रुपये अलग-अलग खातों में पहुंचा दिए गए।

साइबर ठगी के ऐसे मामलों में ठग सीधे बड़ी रकम मांगने के बजाय पहले भरोसा बनाने और फिर अलग-अलग कारण बताकर भुगतान कराने का तरीका अपनाते हैं। बड़े इनाम, नौकरी, निवेश या अन्य लाभ का लालच मिलने पर पीड़ित शुरुआती भुगतान को अंतिम प्रक्रिया समझ लेता है। इसी उम्मीद में अगली मांग भी पूरी कर दी जाती है। इस मामले में भी कथित इनाम मिलने की उम्मीद में भुगतान का सिलसिला बढ़ता गया।

अध्यापक से जब और रकम मांगी गई और पहले भेजे गए 1.50 करोड़ रुपये के बावजूद कथित पुरस्कार नहीं मिला, तब उन्हें ठगी का एहसास हुआ। उन्होंने साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में शिकायत दी। पुलिस ने अज्ञात आरोपितों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है।