चंपावत। उत्तराखंड के चंपावत जिले के लोहाघाट क्षेत्र के माना ढूंगा गांव में एक ऐसी घटना सामने आई, जिसने ग्रामीणों को हैरानी के साथ-साथ चिंता में भी डाल दिया। आमतौर पर तेंदुए को देखते ही लोग अपनी जान बचाने के लिए भागते हैं, लेकिन यहां मामला कुछ अलग ही था। एक तेंदुआ गांव की गौशाला में पहुंच गया और वहां बंधी भैंस के पास लंबे समय तक शांत भाव से बैठा रहा।
जानकारी के अनुसार, गांव निवासी द्वारिका सिंह की गौशाला में भैंस बंधी हुई थी। परिवार के सदस्य सुबह पशुओं को चारा-पानी देने के बाद अपने काम में लग गए। दिन बीतने के बाद जब पशुओं को बांधने के लिए गौशाला की ओर जाया गया, तब वहां कुछ असामान्य हलचल महसूस हुई।
अंधेरा होने के कारण ग्रामीण टॉर्च लेकर अंदर पहुंचे। रोशनी पड़ते ही जो दृश्य सामने आया, उसे देखकर सभी के होश उड़ गए। गौशाला के एक हिस्से में भैंस बंधी थी, जबकि दूसरी ओर एक तेंदुआ आराम से बैठा हुआ था। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि तेंदुए ने किसी प्रकार की आक्रामक प्रतिक्रिया नहीं दी और न ही भैंस को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की।
घटना की खबर कुछ ही देर में पूरे गांव में फैल गई। बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर पहुंच गए। लोगों ने शोर मचाकर तेंदुए को भगाने का प्रयास किया, लेकिन वह काफी देर तक वहीं बैठा रहा। ग्रामीणों के अनुसार, तेंदुआ बेहद शांत दिखाई दे रहा था और मानो किसी सुरक्षित स्थान पर विश्राम कर रहा हो।
करीब दो घंटे तक गौशाला में रहने के बाद तेंदुआ स्वयं उठा और बिना किसी हलचल के जंगल की ओर लौट गया। उसके जाने के बाद ग्रामीणों ने राहत की सांस ली, लेकिन घटना ने क्षेत्र में वन्यजीवों की बढ़ती गतिविधियों को लेकर नई चिंता भी पैदा कर दी है।
स्थानीय लोगों का मानना है कि जंगलों में भोजन और सुरक्षित आवास की कमी के कारण वन्यजीव अब आबादी वाले क्षेत्रों की ओर रुख कर रहे हैं। पिछले कुछ समय से क्षेत्र में तेंदुओं की आवाजाही बढ़ने की घटनाएं सामने आती रही हैं, जिससे ग्रामीणों में भय का माहौल बना हुआ है।
वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि कई बार तेंदुए थकान, गर्मी या असुरक्षित महसूस करने की स्थिति में किसी शांत स्थान पर कुछ समय के लिए रुक जाते हैं। हालांकि, ऐसे मामलों में लोगों को भीड़ लगाने या जानवर को उकसाने से बचना चाहिए और तुरंत वन विभाग को सूचना देनी चाहिए। माना ढूंगा की यह अनोखी घटना अब पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है।

