अल्मोड़ा। जब एक ओर पूरा देश करवाचौथ का पर्व उल्लास और आस्था के साथ मना रहा था, उसी समय अल्मोड़ा जिले के चौखुटिया में पूर्व सैनिक क्षेत्र की जनता के स्वास्थ्य अधिकार के लिए भूख हड़ताल पर डटे रहे। यह कोई साधारण आंदोलन नहीं, बल्कि “ऑपरेशन स्वास्थ्य” नाम से चलाया जा रहा वह जनसत्याग्रह है, जिसने पूरे क्षेत्र को झकझोर दिया है।
पूर्व फौजी भुवन सिंह कठायत ने लगातार आठ दिन तक भूख हड़ताल की। उनका कहना है कि गेवाड़घाटी क्षेत्र में वर्षों से स्वास्थ्य सुविधाएं बदहाल हैं और इलाज के अभाव में कई लोगों ने दम तोड़ दिया है। देश सेवा के बाद जब वे अपने गांव लौटे और यह दर्दनाक हालात देखे, तो उन्होंने एक बार फिर सेवा का रास्ता चुना। इस बार बंदूक की जगह सत्याग्रह का हथियार उठाया।
भुवन सिंह की हालत बिगड़ने पर प्रशासन ने उन्हें जबरन रानीखेत अस्पताल में भर्ती कराया, लेकिन स्थिति में सुधार न होने पर उन्हें हल्द्वानी रेफर किया गया। शुक्रवार को उन्हें हल्द्वानी अस्पताल में भर्ती कराया जा रहा है।
इस संघर्ष में उनकी पत्नी गीता कठायत भी पूरी मजबूती से साथ खड़ी हैं। उन्होंने कहा, “हमारे लिए सबसे पहले हमारी जनता है। जब तक क्षेत्र के लोगों को स्वास्थ्य सुविधा नहीं मिलती, तब तक यह संघर्ष जारी रहेगा।”
भुवन–गीता दंपति के इस आंदोलन को अब व्यापक समर्थन मिलने लगा है। पूर्व विधायक, स्थानीय जनप्रतिनिधि और सैकड़ों ग्रामीण उनके समर्थन में मैदान में उतर चुके हैं। सरकार पर अब दबाव बढ़ गया है कि वह चौखुटिया और गेवाड़घाटी क्षेत्र की स्वास्थ्य सेवाओं का स्थायी समाधान निकाले।
करवाचौथ के दिन जब देशभर की महिलाएं अपने पतियों की लंबी उम्र के लिए व्रत रख रही थीं, उसी समय एक पत्नी अपने पति के साथ समाज के लिए संघर्ष का व्रत निभा रही थी।
भुवन और गीता कठायत की यह जोड़ी आज पूरे समाज के लिए प्रेरणा की मिसाल बन गई है। “एक सैनिक फिर से मोर्चे पर है। फर्क बस इतना है, इस बार दुश्मन है व्यवस्था की बीमारी।” यह लड़ाई है जनसेवा की, जीवन की, और स्वास्थ्य के अधिकार की।

