“कर्नाटक में ढाई-ढाई साल के फॉर्मूले पर मुहर? सिद्धारमैया की विदाई, शिवकुमार की ताजपोशी के संकेत”

Spread the love

नई दिल्ली/बेंगलुरु। कर्नाटक कांग्रेस में लंबे समय से चल रहा नेतृत्व संघर्ष अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचता दिखाई दे रहा है। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार के बीच सत्ता हस्तांतरण को लेकर जारी अटकलों के बीच कांग्रेस हाईकमान ने बदलाव की प्रक्रिया को अंतिम रूप देने की दिशा में कदम बढ़ा दिए हैं। सूत्रों के अनुसार, दिल्ली में कांग्रेस नेतृत्व के साथ हुई मैराथन बैठक के बाद सिद्धारमैया राज्यसभा की भूमिका स्वीकार करने के लिए तैयार हो गए हैं, जबकि डी.के. शिवकुमार को राज्य की कमान सौंपने की तैयारी चल रही है।

बताया जा रहा है कि 28 मई को मुख्यमंत्री आवास ‘कावेरी’ में होने वाली विशेष ब्रेकफास्ट मीटिंग केवल औपचारिक मुलाकात नहीं, बल्कि सत्ता परिवर्तन की रणनीति को अंतिम रूप देने वाला महत्वपूर्ण पड़ाव साबित हो सकती है। इसी बैठक में भविष्य की राजनीतिक रूपरेखा पर सहमति बनने की संभावना जताई जा रही है।

सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सिद्धारमैया को स्पष्ट संदेश दिया है कि मुख्यमंत्री पद छोड़ने के बावजूद पार्टी और राष्ट्रीय राजनीति में उनकी भूमिका कम नहीं होगी। ओबीसी राजनीति के प्रमुख चेहरे के रूप में उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी जिम्मेदारी देने पर भी विचार किया जा रहा है। इसी क्रम में राज्यसभा भेजे जाने का विकल्प सबसे मजबूत माना जा रहा है।

कर्नाटक में कांग्रेस सरकार के तीन वर्ष पूरे होने के बाद नेतृत्व परिवर्तन की चर्चा तेज हुई थी। 2023 विधानसभा चुनाव के बाद सिद्धारमैया और शिवकुमार के बीच कथित “ढाई-ढाई साल” के फार्मूले की चर्चा लगातार होती रही है। अब संकेत मिल रहे हैं कि हाईकमान संगठन और सरकार दोनों के संतुलन को साधते हुए सत्ता परिवर्तन का रास्ता साफ करना चाहता है।

हालांकि कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने सार्वजनिक रूप से किसी भी फैसले की पुष्टि नहीं की है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा जोर पकड़ चुकी है कि राज्यसभा चुनाव की अधिसूचना जारी होने के बाद घटनाक्रम तेजी से आगे बढ़ सकता है। यदि सब कुछ तय योजना के अनुसार हुआ तो सिद्धारमैया राज्यसभा के लिए नामांकन दाखिल करेंगे और उसके बाद डी.के. शिवकुमार मुख्यमंत्री पद की शपथ ले सकते हैं।

कर्नाटक में संभावित नेतृत्व परिवर्तन केवल मुख्यमंत्री बदलने का मामला नहीं है, बल्कि कांग्रेस के भीतर पीढ़ीगत और संगठनात्मक संतुलन साधने की बड़ी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। पार्टी अगले विधानसभा चुनाव से पहले किसी भी प्रकार की अंदरूनी खींचतान समाप्त कर एकजुटता का संदेश देना चाहती है।

फिलहाल पूरे देश की नजर 28 मई की उस ब्रेकफास्ट मीटिंग पर टिकी है, जहां कर्नाटक की राजनीति का नया अध्याय लिखे जाने की संभावना जताई जा रही है।