
सोने और चांदी की कीमतों में लगातार तेजी के बाद शुक्रवार को अचानक गिरावट देखने को मिली। जन्माष्टमी के दिन एमसीएक्स पर सोना करीब 1,200 रुपये तक टूटकर 1,54,605 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर तक पहुंच गया। चांदी भी करीब 1,600 रुपये की गिरावट के साथ 2,39,525 रुपये प्रति किलोग्राम तक आ गई। एक दिन पहले ही दोनों कीमती धातुओं में जोरदार तेजी देखने को मिली थी।
इस गिरावट की सबसे बड़ी वजह बाजार में हुई मुनाफावसूली मानी जा रही है। लगातार तेजी के बाद कई निवेशकों ने मुनाफा सुरक्षित करने के लिए बिकवाली की, जिससे कीमतों पर दबाव बढ़ा। इसके अलावा अमेरिकी डॉलर की चाल और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने भी बाजार की दिशा प्रभावित की।
निवेशकों की नजर अब अमेरिका के रोजगार संबंधी आंकड़ों पर है। ये आंकड़े आगे अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों को लेकर बाजार की उम्मीदों को प्रभावित कर सकते हैं। ब्याज दरों में बदलाव की संभावना का असर सोने की कीमतों पर भी पड़ता है। यही वजह है कि महत्वपूर्ण आंकड़े आने से पहले निवेशकों ने कुछ सतर्कता बरती।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोने और चांदी की कीमतों में कमजोरी दिखाई दी। हालांकि, यह गिरावट केवल भारत तक सीमित नहीं रही, बल्कि वैश्विक बाजार में भी कीमती धातुओं पर दबाव देखने को मिला।
दिलचस्प बात यह है कि एमसीएक्स और सर्राफा बाजार के भाव में अंतर रहा। सर्राफा बाजार में 24 कैरेट सोना करीब 1,54,908 रुपये प्रति 10 ग्राम और 22 कैरेट सोना 1,41,896 रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास रहा। चांदी का खुदरा बाजार भाव भी करीब 2.35 लाख रुपये प्रति किलोग्राम बताया गया। इसका मतलब है कि वायदा बाजार में आई गिरावट का असर हर बाजार में उसी अनुपात में दिखाई दे, यह जरूरी नहीं है।
फिलहाल सोने-चांदी की कीमतों पर कई अंतरराष्ट्रीय कारकों का असर है। अमेरिकी ब्याज दरों की उम्मीद, डॉलर, तेल की कीमतें और वैश्विक तनाव आने वाले दिनों में बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। इसलिए शुक्रवार की गिरावट को केवल एक दिन के उतार-चढ़ाव के तौर पर देखना बेहतर होगा। आने वाले अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों और वैश्विक बाजार के रुख से ही पता चलेगा कि यह महज मुनाफावसूली है या तेजी के दौर में कोई बड़ा बदलाव आने लगा है।




