देश के कई हिस्सों में प्याज की बढ़ती कीमतों ने आम परिवारों की रसोई का बजट बिगाड़ना शुरू किया तो केंद्र सरकार ने बाजार में आपूर्ति बढ़ाने के लिए बड़ा कदम उठाया है। महाराष्ट्र के नासिक से सरकारी भंडार का प्याज विशेष रेल रैक के जरिए उन बड़े शहरों तक पहुंचाया जा रहा है, जहां कीमतें राष्ट्रीय औसत से अधिक चल रही हैं।
इस विशेष रेल परिवहन को ‘कांदा एक्सप्रेस’ नाम दिया गया है। सरकार का लक्ष्य केवल प्याज को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाना नहीं, बल्कि उन बाजारों में उपलब्धता बढ़ाना है जहां कीमतों में तेज उछाल आया है। शुरुआत में पांच बड़े खपत केंद्रों को इसके लिए चुना गया है। इनमें चेन्नई, मदुरै, दिल्ली, एर्नाकुलम और गुवाहाटी शामिल हैं। आगे बाजार की स्थिति और कीमतों को देखते हुए दूसरे शहरों को भी इस व्यवस्था में शामिल किया जा सकता है
उपभोक्ता मामलों की सचिव निधि खरे के अनुसार नासिक से प्याज की खेप रेल रैक में लादी जा रही है। इन खेपों के 26 अगस्त तक संबंधित केंद्रों पर पहुंचने की उम्मीद है। वहां पहुंचने के बाद प्याज को थोक और खुदरा दोनों बाजारों में उतारा जाएगा।
सरकार ने खुदरा बाजार में इस प्याज को 35 रुपये प्रति किलो की दर से उपलब्ध कराने की योजना बनाई है। इसके लिए नैफेड और राष्ट्रीय सहकारी उपभोक्ता महासंघ जैसी सरकारी एजेंसियों के माध्यम से बिक्री की जाएगी।
पहले चरण में नासिक से सरकारी प्याज की आपूर्ति दिल्ली, चेन्नई, बमदुरै, एर्नाकुलम, गुवाहाटी में करेगी। सरकार ने साफ किया है कि यह सूची अंतिम नहीं है। बाजार में जहां जरूरत महसूस होगी, वहां आगे प्याज भेजा जा सकता है।
प्याज की कीमतों में तेजी का अंदाजा सरकारी आंकड़ों से लगाया जा सकता है। 24 अगस्त को देश में प्याज की औसत खुदरा कीमत 43.53 रुपये प्रति किलो पहुंच गई। एक साल पहले इसी अवधि में यह 27.37 रुपये प्रति किलो थी। यानी सालाना आधार पर करीब 59 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज हुई।
थोक कीमत भी तेजी से बढ़ी है। 24 अगस्त को औसत थोक कीमत 35.58 रुपये प्रति किलो रही, जबकि पिछले साल इसी समय यह 21.23 रुपये प्रति किलो थी। यानी थोक कीमत में करीब 68 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
कई प्रमुख शहरों में प्याज की खुदरा कीमत राष्ट्रीय औसत से काफी ऊपर है। सोमवार को चेन्नई में प्याज करीब 60 रुपये किलो, दिल्ली में 55 रुपये किलो और कोलकाता में 53 रुपये किलो तक पहुंच गया था।
सरकार के पास चालू वर्ष के लिए करीब 1.21 लाख टन प्याज का बफर भंडार है। यह भंडार बाजार में अचानक आपूर्ति कम होने और कीमतें बढ़ने की स्थिति से निपटने के लिए तैयार रखा जाता है।
आमतौर पर प्याज की कीमतों में अगस्त-सितंबर के दौरान मौसमी तेजी देखने को मिलती है। त्योहारों के दौरान मांग बढ़ना, मौसम से जुड़ी परेशानियां, आपूर्ति व्यवस्था में बदलाव और बाजार की मांग में उतार-चढ़ाव इसके प्रमुख कारणों में शामिल हैं।



