पहाड़ों में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के दावों के बीच चंपावत में सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था की उस चुनौती को सामने लाता है, जिसका सामना दूरदराज के मरीज लंबे समय से करते रहे हैं। 22 वर्षीय गर्भवती प्रियंका सामंत के गर्भस्थ शिशु की मौत के बाद जिला अस्पताल में स्त्री रोग विशेषज्ञ उपलब्ध नहीं होने की बात सामने आई और महिला को हायर सेंटर रेफर कर दिया गया। परिजनों ने उपचार में देरी और जांच रिपोर्ट में गंभीर अंतर का आरोप लगाया है।
परिजनों के मुताबिक, 14 अगस्त को लोहाघाट उप जिला अस्पताल में हुए अल्ट्रासाउंड में गर्भस्थ शिशु को स्वस्थ बताया गया था। 18 अगस्त को प्रियंका को तेज पेट दर्द हुआ। सड़क बंद होने के कारण पति जीवन सिंह उन्हें करीब तीन किलोमीटर पैदल लेकर आए और फिर वाहन से अस्पताल पहुंचाया।
इसके बाद चंपावत के एक निजी अस्पताल में कराए गए अल्ट्रासाउंड में परिवार को बताया गया कि गर्भस्थ शिशु की करीब दो सप्ताह पहले ही मौत हो चुकी थी। जिला अस्पताल पहुंचने पर परिजनों को स्त्री रोग विशेषज्ञ उपलब्ध नहीं होने की जानकारी दी गई और महिला को हायर सेंटर रेफर कर दिया गया।
जिला अस्पताल के पीएमएस डॉ. एचएस ह्यांकी के अनुसार, करीब सात दिन पहले की अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट में गर्भस्थ शिशु को स्वस्थ बताया गया था। उन्होंने दोनों जांचों के बीच पर्याप्त अंतर होने की बात कही और विशेषज्ञ उपलब्ध नहीं होने के कारण महिला को बेहतर उपचार के लिए हायर सेंटर रेफर किए जाने की जानकारी दी।
सोशल मीडिया पर पति जीवन सिंह ने अस्पताल की व्यवस्थाओं को लेकर अपनी नाराजगी भी जाहिर की है और मामले की जांच कर जिम्मेदारी तय करने की मांग उठाई है।



