हल्द्वानी। कभी शिक्षा के क्षेत्र से जुड़कर युवाओं के बीच अपनी पहचान बनाने वालीं डॉ. छवि कांडपाल बोरा ने राजनीति में भी अपनी अलग पहचान बनाई है। 2025 के जिला पंचायत चुनाव में उन्होंने रामड़ी आन सिंह सीट से निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव जीतकर सियासी समीकरणों को चौंका दिया था। अब जिला पंचायत से आगे विधानसभा की राजनीति में कदम बढ़ाने की उनकी तैयारी ने क्षेत्र की सियासत में नई चर्चा छेड़ दी है।
रामड़ी आन सिंह सीट पर छवि कांडपाल बोरा की जीत इसलिए भी खास रही, क्योंकि यह मुकाबला भाजपा के लिए प्रतिष्ठा से जुड़ा माना जा रहा था। उन्होंने भाजपा समर्थित प्रत्याशी और निवर्तमान जिला पंचायत अध्यक्ष बेला तोलिया को शिकस्त दी। चुनाव परिणाम ने यह संदेश दिया कि स्थानीय स्तर पर उनकी अपनी पकड़ और जनता के बीच स्वीकार्यता है।
उनके पति प्रमोद बोरा भाजपा से लंबे समय से जुड़े रहे हैं। चुनाव परिणाम के बाद छवि कांडपाल बोरा ने खुद कहा था कि उनके पति 22 साल से भाजपा के साथ हैं और वह भी भाजपा से अलग नहीं हुई हैं। उन्होंने स्पष्ट किया है कि भाजपा का शीर्ष नेतृत्व जो आदेश देगा, उसी के अनुसार आगे बढ़ेंगी।
अब उनकी नजर विधानसभा की राजनीति पर है। क्षेत्र में उनकी सक्रियता और स्थानीय मुद्दों को लेकर उठाई जा रही आवाज को उनकी आगे की राजनीतिक तैयारी से जोड़कर देखा जा रहा है। खासकर ग्रामीण क्षेत्रों की सड़क, वन्यजीवों से जुड़ी समस्या और स्थानीय विकास जैसे मुद्दों पर उनकी सक्रियता सामने आई है।
युवाओं को लेकर भी उनकी राजनीति का एक अलग पक्ष सामने आता है। रोजगार और युवाओं के लिए बेहतर अवसर जैसे मुद्दों को वह अपनी प्राथमिकताओं में रखती हैं। ऐसे में शिक्षण और युवाओं से जुड़ाव की पृष्ठभूमि को विधानसभा की राजनीति से जोड़ना उनके लिए एक अलग राजनीतिक पहचान बनाने का आधार बन सकता है।
सवाल अब यह है कि क्या जिला पंचायत में जनता के भरोसे निर्दलीय जीत दर्ज करने वाली छवि कांडपाल बोरा विधानसभा के बड़े मैदान में भी इसी भरोसे को आगे बढ़ाएंगी?
उनका रुख फिलहाल साफ है कि आगे की राजनीतिक राह जनता के हित और हाईकमान के निर्देश के अनुसार तय होगी। ऐसे में आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि शिक्षण से जिला पंचायत और जिला पंचायत से विधानसभा की राजनीति तक पहुंचने की उनकी कोशिश किस दिशा में जाती है।



