पीएम आवास तक पहुंची सियासी जंग: छात्र आंदोलन अब राजनीतिक टकराव के केंद्र में

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नई दिल्ली में नीट से जुड़े मुद्दों को लेकर शुरू हुआ छात्र आंदोलन अब पूरी तरह राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में आ गया है। प्रधानमंत्री आवास के बाहर कांग्रेस के प्रदर्शन और विपक्ष के कई बड़े नेताओं की हिरासत ने इस विवाद को केवल शिक्षा के सवाल तक सीमित नहीं रहने दिया। अब यह मुद्दा सरकार और विपक्ष के बीच सीधी राजनीतिक लड़ाई का रूप ले चुका है।

कांग्रेस का कहना है कि वह छात्रों की मांगों के समर्थन में सड़क पर उतरी है और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े सवालों पर सरकार को जवाबदेह बनाना चाहती है। वहीं, सरकार और उसके समर्थक इसे राजनीतिक प्रदर्शन बताते हुए आरोप लगा रहे हैं कि छात्र आंदोलन को राजनीतिक मंच में बदलने की कोशिश की जा रही है।

प्रधानमंत्री आवास के निकट प्रदर्शन के दौरान नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा और समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव समेत कई नेताओं को पुलिस ने हिरासत में लिया। इसके बाद यह घटनाक्रम केवल विरोध प्रदर्शन नहीं रहा, बल्कि लोकतांत्रिक अधिकार, कानून-व्यवस्था और राजनीतिक रणनीति पर भी बहस का विषय बन गया।

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राजनीतिक विश्लेषकों की नजर में अब इस पूरे घटनाक्रम का सबसे बड़ा असर छात्रों के मूल मुद्दों पर पड़ सकता है। यदि राजनीतिक दलों के बीच टकराव बढ़ता है, तो चर्चा का केंद्र छात्रों की मांगों से हटकर सत्ता और विपक्ष की बयानबाज़ी बन सकता है। दूसरी ओर, विपक्ष का मानना है कि बड़े राजनीतिक दबाव के बिना सरकार पर निर्णय लेने का दबाव नहीं बनता।

ऐसे में आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या छात्र आंदोलन अपनी मूल मांगों पर केंद्रित रह पाता है या फिर राष्ट्रीय राजनीति की धुरी बनकर संसद से लेकर सड़क तक सत्ता और विपक्ष के बीच नई सियासी जंग का प्रमुख मुद्दा बन जाता है।