बदरीनाथ-केदारनाथ समेत उत्तराखंड के कई संस्थानों को बम धमाके की धमकी, पुलिस और खुफिया एजेंसियां अलर्ट

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देहरादून/हरिद्वार। उत्तराखंड में धार्मिक स्थलों, सरकारी संस्थानों और पुलिस प्रतिष्ठानों को बम से उड़ाने की धमकी मिलने के बाद सुरक्षा एजेंसियों में हड़कंप मच गया है। अलग-अलग माध्यमों से भेजी गई धमकियों में चारधाम यात्रा के प्रमुख पड़ावों के साथ-साथ प्रदेश के पुलिस थानों को निशाना बनाने की बात कही गई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है तथा खुफिया तंत्र को भी सक्रिय कर दिया गया है।

जानकारी के अनुसार हरिद्वार नगर निगम और मसूरी नगर पालिका को ई-मेल के माध्यम से धमकी भरे संदेश प्राप्त हुए। इन संदेशों में हरिद्वार, ऋषिकेश, बदरीनाथ धाम और केदारनाथ धाम जैसे महत्वपूर्ण धार्मिक स्थलों का उल्लेख करते हुए विस्फोट करने की चेतावनी दी गई। ई-मेल भेजने वाले ने स्वयं को कथित रूप से खालिस्तान समर्थक संगठन से जुड़ा बताया है और कुछ पुराने मामलों का बदला लेने जैसी बातें भी लिखी हैं।

धमकी भरा संदेश मिलने के बाद स्थानीय प्रशासन और पुलिस तुरंत हरकत में आ गई। संवेदनशील स्थलों की सुरक्षा बढ़ा दी गई है तथा संबंधित परिसरों की निगरानी तेज कर दी गई है। अधिकारियों ने बताया कि मामले की जांच साइबर विशेषज्ञों और खुफिया एजेंसियों की मदद से की जा रही है ताकि ई-मेल भेजने वाले की वास्तविक पहचान सामने लाई जा सके।

इधर, एक अन्य मामले में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए उत्तराखंड के सभी पुलिस थानों को बम धमाकों की धमकी दी गई है। पुलिस के अनुसार 22 जून को इंटरनेट पर एक पोस्ट प्रसारित हुई, जिसमें दावा किया गया कि 25 जून को प्रदेश के विभिन्न थानों में विस्फोट किए जाएंगे। पोस्ट वायरल होने के बाद पुलिस प्रशासन ने इसे गंभीरता से लिया और तत्काल जांच शुरू की।

प्राथमिक जांच के दौरान पुलिस को हरियाणा के अंबाला शहर से जुड़े एक युवक का नाम सामने आने की जानकारी मिली है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि धमकी देने की घटना किसी एक व्यक्ति की हरकत है या इसके पीछे कोई संगठित नेटवर्क काम कर रहा है। पुलिस को यह भी संदेह है कि मामले में अन्य लोगों की भूमिका हो सकती है।

जांच में सामने आया कि धमकी संबंधी संदेश पहले एक सोशल मीडिया अकाउंट से साझा किया गया था, जिसके बाद उसे अन्य प्लेटफॉर्मों पर भी फैलाया गया। इससे आम लोगों में भय और असुरक्षा का माहौल बनने की आशंका बढ़ गई। पुलिस साइबर ट्रैकिंग के जरिए संबंधित अकाउंट और उससे जुड़े डिजिटल रिकॉर्ड खंगाल रही है।

वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने बताया कि धमकी से जुड़े सभी तकनीकी साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं। संबंधित सोशल मीडिया अकाउंट्स की सत्यता की जांच की जा रही है और जरूरत पड़ने पर अन्य राज्यों की पुलिस से भी सहयोग लिया जाएगा। मामले में भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं तथा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है।

पुलिस का कहना है कि धार्मिक स्थलों, सरकारी कार्यालयों और पुलिस प्रतिष्ठानों की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की गई है। संवेदनशील क्षेत्रों में अतिरिक्त सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही आम जनता से अपील की गई है कि सोशल मीडिया पर प्रसारित होने वाली अपुष्ट और भ्रामक सूचनाओं पर विश्वास न करें तथा किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस को दें।

फिलहाल सुरक्षा एजेंसियां धमकी के स्रोत तक पहुंचने और इसके पीछे की वास्तविक मंशा का पता लगाने में जुटी हैं। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि मामला केवल अफवाह फैलाने का प्रयास था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश छिपी हुई है।