23वें फीफा वर्ल्ड कप से पहले छलका फुटबॉल विशेषज्ञ का दर्द, बोले- 150 करोड़ की आबादी वाला भारत आखिर विश्व कप से क्यों दूर?

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पूर्व राष्ट्रीय खिलाड़ी डॉ. वीरेन्द्र सिंह रावत का भारतीय फुटबॉल व्यवस्था पर सवाल, बोले, राजनीति और भ्रष्टाचार ने खेल को पीछे धकेला

देहरादून। 11 जून से अमेरिका, मेक्सिको और कनाडा की संयुक्त मेजबानी में शुरू होने जा रहे 23वें फीफा विश्व कप 2026 को लेकर दुनिया भर में उत्साह का माहौल है। इसी बीच भारतीय फुटबॉल की स्थिति को लेकर पूर्व राष्ट्रीय फुटबॉल खिलाड़ी, रेफरी, अंतरराष्ट्रीय कोच और राज्य आंदोलनकारी डॉ. वीरेन्द्र सिंह रावत का दर्द एक बार फिर सामने आया है।

डॉ. रावत ने कहा कि दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी आबादी वाला भारत आज भी फीफा रैंकिंग में 142वें स्थान पर है, जो देश की खेल व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। उन्होंने कहा कि भारत में संसाधनों, खिलाड़ियों, मैदानों और खेल सुविधाओं की कोई कमी नहीं है, फिर भी देश फीफा विश्व कप के लिए 11 बेहतरीन खिलाड़ियों की टीम तैयार नहीं कर पा रहा है।

उन्होंने कहा कि 11 जून से 19 जुलाई 2026 तक चलने वाले फीफा विश्व कप में पहली बार 48 टीमें हिस्सा लेंगी और कुल 104 मुकाबले खेले जाएंगे। टूर्नामेंट का उद्घाटन मेक्सिको सिटी में होगा, जबकि फाइनल अमेरिका के न्यूयॉर्क में खेला जाएगा। दुनिया के दिग्गज खिलाड़ी लियोनेल मेसी, किलियन एम्बाप्पे, एरलिंग हालैंड, नेमार, क्रिस्टियानो रोनाल्डो, जूड बेलिंघम और विनीसियस जूनियर पर फुटबॉल प्रेमियों की निगाहें रहेंगी।

डॉ. रावत ने याद दिलाया कि वर्ष 2018 में उन्होंने कहा था कि यदि भारत जमीनी स्तर (ग्रासरूट्स) पर गंभीरता से काम करे तो 2026 विश्व कप में टीमों की संख्या बढ़ने का लाभ उठाकर क्वालीफाई कर सकता है। लेकिन ऐसा नहीं हो सका। उनका आरोप है कि भारतीय फुटबॉल वर्षों से राजनीति और स्वार्थों की भेंट चढ़ा हुआ है।

उन्होंने कहा कि दुनिया के कई छोटे देश, जिनकी आबादी भारत के मुकाबले बेहद कम है, विश्व कप में जगह बनाने में सफल रहे हैं। इसके बावजूद भारत का लगातार पीछे रहना चिंताजनक है। उन्होंने फुटबॉल प्रशासन से जुड़े अधिकारियों और संगठनों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि खेलों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित किए बिना सुधार संभव नहीं है।

डॉ. रावत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से खेलों के लिए बनाए गए नए ढांचे और नीतियों को सख्ती से लागू करने की मांग की। उनका मानना है कि यदि गांव, ब्लॉक, जिला और राज्य स्तर पर फुटबॉल की मजबूत नर्सरी विकसित की जाए तथा ईमानदार और समर्पित लोगों को जिम्मेदारी दी जाए, तो भारत वर्ष 2034 तक फीफा विश्व कप में खेलने का सपना साकार कर सकता है।

उन्होंने कहा कि भारतीय फुटबॉल को बचाने और आगे बढ़ाने के लिए अब केवल बातें नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर ठोस और ईमानदार प्रयासों की आवश्यकता है।