हल्द्वानी से लेकर केदारघाटी तक झमाझम बारिश, कुमाऊं-गढ़वाल के पहाड़ों में ओलावृष्टि
हल्द्वानी। पिछले एक सप्ताह से भीषण गर्मी, लू और बढ़ते तापमान से जूझ रहे उत्तराखंड को आखिरकार मौसम ने बड़ी राहत दी है। शनिवार को हल्द्वानी समेत कुमाऊं और गढ़वाल के अधिकांश जिलों में मौसम ने अचानक करवट ली। कई स्थानों पर तेज हवाओं के साथ बारिश हुई, जबकि पर्वतीय क्षेत्रों में ओलावृष्टि दर्ज की गई। बारिश के बाद तापमान में उल्लेखनीय गिरावट आई और लोगों ने राहत की सांस ली। मौसम विभाग के अनुसार प्रदेश के कई हिस्सों में अगले कुछ दिनों तक भी मौसम सक्रिय बना रह सकता है।
मई के अंतिम सप्ताह में हल्द्वानी, रुद्रपुर, काशीपुर, हरिद्वार और देहरादून जैसे मैदानी क्षेत्रों में तापमान लगातार 38 से 42 डिग्री सेल्सियस के बीच बना हुआ था। उमसभरी गर्मी और लू जैसे हालात लोगों को परेशान कर रहे थे। कई जिलों में हीटवेव की चेतावनी तक जारी की गई थी।
हल्द्वानी और नैनीताल जिले में झमाझम बारिश हल्द्वानी शहर में दोपहर बाद बादल घिरने शुरू हुए और शाम तक कई क्षेत्रों में अच्छी बारिश हुई। नैनीताल, भीमताल, भवाली, रामगढ़, मुक्तेश्वर और धारी क्षेत्र में भी वर्षा हुई। ऊंचाई वाले इलाकों में कहीं-कहीं ओले भी गिरे, जिससे मौसम पूरी तरह बदल गया। लोगों ने लंबे समय बाद मई के महीने में ठंडी हवाओं का आनंद लिया। कुमाऊं के इन क्षेत्रों में हुई ओलावृष्टि कुमाऊं मंडल के कई पर्वतीय क्षेत्रों में ओलावृष्टि की सूचना मिली।

मुक्तेश्वर रामगढ़ धारी ओखलकांडा सोमेश्वर द्वाराहाट ताकुला बागेश्वर के ऊंचाई वाले क्षेत्र पिथौरागढ़ और मुनस्यारी के आसपास के इलाके शाम के समय कई स्थानों पर खेतों और सड़कों पर ओलों की सफेद परत दिखाई दी। स्थानीय लोगों के अनुसार कुछ समय के लिए ऐसा लगा मानो हल्की बर्फबारी हुई हो।
गढ़वाल में भी बरसे मेघ
गढ़वाल मंडल में भी मौसम का असर व्यापक रहा। चमोली, जोशीमठ, रुद्रप्रयाग, केदारघाटी, उत्तरकाशी और टिहरी जिले के कई हिस्सों में तेज बारिश दर्ज की गई। ऊंचाई वाले इलाकों में ओलावृष्टि भी हुई। मौसम विभाग ने इन क्षेत्रों में तेज हवाओं और गरज-चमक के साथ बारिश का अलर्ट जारी किया था। कई जगहों पर हवा की रफ्तार 50 से 60 किलोमीटर प्रतिघंटा तक पहुंचने की संभावना जताई गई थी। देहरादून और मसूरी में भी दिखा मौसम का असर राजधानी देहरादून और मसूरी में भी तेज बारिश और आंधी ने दस्तक दी। कई स्थानों पर पेड़ गिरने और बिजली आपूर्ति प्रभावित होने की खबरें सामने आईं। हालांकि बारिश के बाद तापमान में करीब 4 से 5 डिग्री सेल्सियस तक की कमी दर्ज की गई, जिससे लोगों को गर्मी से राहत मिली।
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जंगलों की आग पर भी पड़ा असर
इस वर्ष उत्तराखंड में जंगलों की आग बड़ी चुनौती बनी हुई थी। लगातार बढ़ते तापमान और शुष्क मौसम के कारण सैकड़ों हेक्टेयर वन क्षेत्र प्रभावित हुआ। बारिश के बाद कई क्षेत्रों में वनाग्नि की घटनाओं पर नियंत्रण पाने में मदद मिली है। वन विभाग को उम्मीद है कि यदि अगले कुछ दिनों तक मौसम ऐसा ही बना रहा तो आग की घटनाओं में और कमी आएगी।
किसानों के चेहरे खिले, लेकिन बागवानों की बढ़ी चिंता बारिश से खेतों को नमी मिली है, जिससे खरीफ सीजन की तैयारियों को लाभ होगा। वहीं पर्वतीय क्षेत्रों में हुई ओलावृष्टि ने फल उत्पादकों की चिंता भी बढ़ा दी है। सेब, आड़ू, खुबानी, प्लम और अन्य फलों पर ओलों के असर का आकलन किया जा रहा है। हालांकि अधिकांश क्षेत्रों में बारिश को कृषि के लिए लाभदायक माना जा रहा है। आगे कैसा रहेगा मौसम? मौसम विभाग के अनुसार अगले 48 से 72 घंटों तक उत्तराखंड के कई जिलों में बारिश, गरज-चमक और तेज हवाओं की संभावना बनी हुई है। पर्वतीय जिलों में कहीं-कहीं ओलावृष्टि भी हो सकती है। प्रशासन ने लोगों को खराब मौसम के दौरान सतर्क रहने और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में अनावश्यक यात्रा से बचने की सलाह दी है।
निष्कर्ष भीषण गर्मी और लू से जूझ रहे उत्तराखंड के लिए यह बारिश राहत लेकर आई है। हल्द्वानी से लेकर नैनीताल, अल्मोड़ा, पिथौरागढ़, चमोली, रुद्रप्रयाग और उत्तरकाशी तक मौसम के बदले मिजाज ने लोगों को राहत दी है। हालांकि ओलावृष्टि ने कुछ क्षेत्रों में किसानों और बागवानों की चिंता बढ़ाई है, लेकिन कुल मिलाकर यह वर्षा गर्मी से राहत और पर्यावरण के लिए सकारात्मक संकेत मानी जा रही है।

