हल्द्वानी। उत्तराखंड की राजनीति में इन दिनों पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत का 15 दिन का ‘राजनीतिक अवकाश’ चर्चा का विषय बना हुआ है। इस अवकाश को कांग्रेस के भीतर चल रही नाराजगी से जोड़कर देखा जा रहा है। दिलचस्प बात यह है कि जिस विवाद से इस पूरे घटनाक्रम की शुरुआत मानी जा रही थी, अब उसी के केंद्र में रहे नेता संजय नेगी खुद ‘हरदा’ से मिलकर अवकाश खत्म करने की अपील कर रहे हैं।
दरअसल, रामनगर के युवा नेता संजय नेगी की कांग्रेस में संभावित वापसी को लेकर पार्टी के भीतर लंबे समय से खींचतान चल रही है। राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज रही कि इसी मुद्दे से नाराज होकर हरीश रावत ने कुछ समय के लिए सक्रिय राजनीति से दूरी बनाने का फैसला किया। हालांकि इस पर आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई, लेकिन पार्टी के भीतर बयानबाजी लगातार जारी है।
मुलाकात ने बदला सियासी समीकरण
इस पूरे घटनाक्रम में नया मोड़ तब आया जब संजय नेगी खुद हरीश रावत से मिलने पहुंचे। बंद कमरे में हुई लंबी बातचीत के बाद नेगी ने कहा कि उन्होंने ‘हरदा’ से राजनीतिक अवकाश समाप्त कर फिर से सक्रिय भूमिका निभाने का अनुरोध किया है।
नेगी ने साफ किया कि उनकी ज्वाइनिंग को लेकर जो विवाद खड़ा हुआ, उसे देखते हुए उन्होंने खुद पहल की। उन्होंने यह भी कहा कि अब इस मामले को ज्यादा तूल नहीं दिया जाना चाहिए और पार्टी के हित में हरीश रावत को सक्रिय राजनीति में लौटना चाहिए।
हाईकमान पर छोड़ा फैसला
संजय नेगी ने यह भी स्पष्ट किया कि कांग्रेस में उनकी संभावित वापसी का फैसला अब पूरी तरह पार्टी हाईकमान पर छोड़ा जाना चाहिए। संगठन जो भी निर्णय लेगा, वह उसे स्वीकार करेंगे और पार्टी की एकजुटता को नुकसान नहीं पहुंचाना चाहते।
कांग्रेस में अलग-अलग सुर
इस मुद्दे पर कांग्रेस के भीतर अलग-अलग राय सामने आ रही है। पूर्व मंत्री हरक सिंह रावत, वरिष्ठ नेता गोविंद सिंह कुंजवाल और विधायक हरीश धामी ने अलग-अलग अंदाज में प्रतिक्रिया दी है।
कुछ नेताओं का मानना है कि हरीश रावत पार्टी का बड़ा चेहरा हैं और उनकी गैरमौजूदगी संगठन के लिए चिंता का विषय हो सकती है। वहीं, दूसरी ओर कुछ नेताओं का कहना है कि कांग्रेस किसी एक व्यक्ति पर निर्भर नहीं है और संगठन में सभी की भूमिका महत्वपूर्ण है।
प्रीतम सिंह की संतुलित प्रतिक्रिया
वरिष्ठ कांग्रेस नेता प्रीतम सिंह ने इस पूरे मामले पर संतुलित प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि भावनाओं में बहकर दिए गए बयान पार्टी के हित में नहीं हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि हरीश रावत जल्द ही सक्रिय राजनीति में वापसी करेंगे और संगठन को मजबूत करेंगे।
कौन हैं संजय नेगी?
संजय नेगी रामनगर के ज्येष्ठ ब्लॉक प्रमुख हैं और उनकी पत्नी वर्तमान में ब्लॉक प्रमुख हैं। 2022 विधानसभा चुनाव में उन्होंने रामनगर सीट से निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ा था, लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा। उस समय कांग्रेस ने महेंद्र पाल को टिकट दिया था, जबकि नेगी खुद टिकट के दावेदार थे। टिकट न मिलने पर उन्होंने बगावत कर चुनाव लड़ा, जिसके बाद पार्टी ने उन्हें अनुशासनहीनता के आरोप में निष्कासित कर दिया।
टिकट विवाद से जुड़ी पुरानी खींचतान
रामनगर सीट को लेकर 2022 में हरीश रावत और रणजीत रावत के बीच भी खींचतान रही थी। हरीश रावत ने महेंद्र पाल के पक्ष में पैरवी की थी। वहीं, वर्तमान में रणजीत रावत और महेंद्र पाल दोनों ही संजय नेगी की पार्टी में वापसी का विरोध कर रहे हैं।
अब सबकी नजर अगले कदम पर
संजय नेगी और हरीश रावत की मुलाकात ने कांग्रेस के भीतर चल रही हलचल को नया मोड़ दे दिया है। अब सभी की निगाह इस बात पर टिकी है कि हरीश रावत कब अपना राजनीतिक अवकाश समाप्त करते हैं और कांग्रेस हाईकमान संजय नेगी की वापसी को लेकर क्या फैसला लेता है।

