रुद्रप्रयाग। मकर संक्रांति के पावन पर्व पर अगस्त्यमुनि महाराज की डोली यात्रा उस समय विवाद और आक्रोश का कारण बन गई, जब केदारनाथ हाईवे पर स्थित अगस्त्य ऋषि मैदान के मुख्य द्वार पर लगी गोल गेट के चलते देव डोली को प्रवेश नहीं मिल सका। करीब 15 वर्षों बाद आयोजित दिवारा यात्रा में प्रशासनिक लापरवाही सामने आई, जिससे श्रद्धालुओं में गहरी नाराजगी देखने को मिली।
बुधवार को वैदिक मंत्रोच्चारण और विधि-विधान से पूजा-अर्चना के बाद अगस्त्यमुनि स्थित अगस्त्य ऋषि मंदिर से मुनि महाराज की चल विग्रह डोली दिवारा यात्रा के लिए रवाना हुई। क्षेत्र के विभिन्न गांवों से सैकड़ों श्रद्धालु देव दर्शन के लिए पहुंचे। ‘मुनि महाराज की जय’ के जयकारों से पूरा क्षेत्र भक्तिमय वातावरण में डूब गया।
यात्रा के पहले ही दिन जैसे ही देव डोली अगस्त्य ऋषि मैदान की ओर बढ़ी, बड़ी संख्या में श्रद्धालु उसके साथ चल पड़े। लेकिन मैदान के मुख्य द्वार पर लगे गोल गेट के कारण डोली को अंदर प्रवेश नहीं मिल सका। इसके चलते हाईवे पर श्रद्धालुओं और राहगीरों की भारी भीड़ जमा हो गई।
हाईवे पर घंटों जाम, एंबुलेंस भी फंसी
स्थिति बिगड़ते ही राष्ट्रीय राजमार्ग पर दोनों ओर करीब तीन से चार किलोमीटर लंबा जाम लग गया। करीब तीन घंटे तक चले जाम में बारात की गाड़ियां, सैकड़ों यात्री और मरीज को ले जा रही एंबुलेंस तक फंसी रही, जिससे लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।
डोली समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि दिवारा यात्रा को लेकर प्रशासन को पहले ही अवगत कराया गया था और गोल गेट हटाने की मांग भी की गई थी, लेकिन समय रहते कोई कार्रवाई नहीं हुई। करीब पांच घंटे तक प्रशासन के मौके पर न पहुंचने से अंततः देव डोली को वापस अगस्त्य ऋषि मंदिर लौटना पड़ा।
लोगों ने बताया अशुभ संकेत
घटना के बाद क्षेत्र में नाराजगी का माहौल है। सामाजिक कार्यकर्ता त्रिभुवन चौहान ने कहा कि देव डोली का इस तरह लौटना क्षेत्र के लिए अशुभ संकेत माना जा रहा है। श्रद्धालुओं का कहना है कि आस्था से जुड़े इतने बड़े आयोजन में प्रशासन की लापरवाही ने धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाई है।

