‘मोंथा’ ने मचाई तबाही, आंध्र प्रदेश में एक की मौत, दो घायल

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नई दिल्ली। खतरनाक चक्रवाती तूफान मोंथा ने सोमवार देर रात आंध्र प्रदेश के पूर्वी तट पर दस्तक दी। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, यह तूफान मछलीपट्टनम और कलिंगपट्टनम के बीच काकीनाडा के पास तट से टकराया। इस दौरान हवाओं की रफ्तार 100 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच गई और समुद्र में 10 फीट तक ऊंची लहरें उठीं।

तूफान का असर और जनहानि

मोंथा के कारण आंध्र प्रदेश और ओडिशा के कई जिलों में भारी बारिश और तेज हवाएं चलीं। कोनासीमा जिले में पेड़ गिरने से एक बुजुर्ग महिला की मौत हो गई, जबकि एक बालक और एक ऑटो चालक घायल हुए। तेज हवाओं के कारण कई इलाकों में बिजली के तार टूट गए और नारियल के पेड़ उखड़ गए।

कहां-कहां पड़ा असर

आंध्र प्रदेश के अल्लूरी सीताराम राजू, काकीनाडा, कृष्णा, एलुरु, पूर्वी और पश्चिमी गोदावरी, डॉ. बी.आर. अंबेडकर कोनासीमा, चिंतुरू और रामपचोदवरम जिलों में तूफान का सबसे अधिक प्रभाव देखा गया। राज्य सरकार ने मंगलवार रात 8.30 बजे से बुधवार सुबह 6 बजे तक सात जिलों में वाहनों की आवाजाही रोकने के आदेश दिए हैं।

तैयारियां और राहत कार्य

सरकार ने आपात स्थिति से निपटने के लिए 81 वायरलेस टावर, 21 हाई मास्क लाइट, 1,447 अर्थमूवर, 321 ड्रोन और 1,040 चेनसॉ तैनात किए हैं। अब तक 3.6 करोड़ लोगों को अलर्ट संदेश भेजे जा चुके हैं। मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने समीक्षा बैठक में बताया कि नेल्लोर जिले में सबसे अधिक 12.6 सेमी बारिश दर्ज की गई।

कमजोर पड़ा तूफान

IMD के अनुसार, मंगलवार सुबह तक मोंथा की तीव्रता घट गई है और यह अब ओडिशा की ओर बढ़ते हुए धीरे-धीरे कमजोर हो रहा है। तूफान के कारण अब तक राज्य के 22 जिलों के 403 मंडल प्रभावित हुए हैं। मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि निचले इलाकों और जलमग्न खेतों में खड़ी फसलों को नुकसान हो सकता है।

नाम का अर्थ

‘मोंथा’ नाम थाईलैंड की ओर से दिया गया है, जिसका अर्थ थाई भाषा में सुगंधित फूल होता है। साल 2004 से चक्रवातों के नामकरण की यह परंपरा शुरू हुई थी, ताकि इनके प्रति जनजागरूकता और पहचान बढ़ाई जा सके।