वीआईपी दौरे से अलग, टुकटुक में बैठकर देखिए हल्द्वानी

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मिशन 2027 पर भाजपा का मंथन, हल्द्वानी में लोगों की चर्चा- आखिर वोट क्यों दें?

हल्द्वानी में बुधवार को भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन पहुंचे तो रामपुर रोड स्थित विंटेज ग्रीन में पार्टी की विस्तारित प्रदेश कार्यसमिति की बैठक हुई। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी समेत प्रदेश के वरिष्ठ नेता, मंत्री, सांसद, विधायक और संगठन के पदाधिकारी जुटे। बैठक में वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर संगठन की तैयारियों और रणनीति पर मंथन हुआ। बूथ स्तर तक संगठन को मजबूत करने से लेकर सरकार के काम को जनता तक पहुंचाने सहित कई विषयों पर चर्चा हुई।

आयोजन स्थल के आसपास वीआईपी वाहनों की आवाजाही के बीच राष्ट्रीय अध्यक्ष के पहुंचने से पहले मार्ग की सफाई और सड़क के गड्ढे भरने का काम भी हुआ। यह दृश्य हल्द्वानी के लोगों के बीच चर्चा का कारण बना। लोगों की बातचीत में सवाल उठा कि जिस शहर की सड़क और सफाई व्यवस्था किसी बड़े नेता के आने से पहले दुरुस्त की जा सकती है, वही व्यवस्था आम दिनों में क्यों नहीं दिखाई देती?

बाजार में दुकानदारों से लेकर रास्ते में मिलने वाले लोगों तक बातचीत का रुख धीरे-धीरे चुनाव की तरफ मुड़ता है। लोगों का कहना है कि नेता चुनाव के समय उनके बीच आते हैं, बैठकों में चुनावी रणनीति बनती है और जनता से वोट मांगा जाता है। लेकिन आम आदमी के लिए चुनाव का मतलब केवल राजनीतिक समीकरण नहीं है। उसके लिए अपने शहर की सड़क, यातायात, सफाई, रोजगार और रोजमर्रा की सुविधाएं ज्यादा मायने रखती हैं।

एक स्थानीय कारोबारी ने बातचीत में कहा कि बड़े नेताओं का आना शहर के लिए अच्छी व्यवस्था देखने का मौका तो बनता है, लेकिन ऐसी व्यवस्था केवल वीआईपी दौरे तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। आम आदमी भी उसी सड़क पर चलता है, उसी यातायात में फंसता है और उसी शहर में रहता है। लोगों की अपेक्षा है कि शहर की समस्याओं का समाधान किसी खास दौरे की तैयारी के रूप में नहीं, बल्कि नियमित व्यवस्था के तौर पर हो।

इसी बातचीत में लोगों की ओर से एक दिलचस्प बात भी सामने आई। उनका कहना था कि अगर राष्ट्रीय अध्यक्ष और मुख्यमंत्री को वास्तव में हल्द्वानी की स्थिति समझनी है तो कभी वीआईपी वाहनों के काफिले से अलग होकर टुकटुक यानी ई-रिक्शा में बैठकर शहर घूमना चाहिए। टुकटुक में बैठकर बाजार और शहर की सड़कों से गुजरेंगे तो वही हल्द्वानी दिखाई देगा, जिसे आम आदमी रोज देखता है। रास्ते में किसी दुकानदार से बात होगी तो कारोबार की परेशानी पता चलेगी, किसी चालक से बात होगी तो सड़क और यातायात की स्थिति सामने आएगी और किसी युवा से बात होगी तो उसकी अपनी चिंता सुनाई देगी।

लोगों का कहना है कि वर्ष 2027 की तैयारी केवल राजनीतिक बैठकों में नहीं, जनता के बीच भी होनी चाहिए। आखिर जिस जनता से वोट मांगना है, उससे यह जानना भी जरूरी है कि वह अपने शहर और सरकार से क्या चाहती है। जनता के बीच से उठ रहा यह सवाल भी सुनना जरूरी हैकि आखिर उसे वोट क्यों दें? भले ही मिशन 2027 की तैयारी भाजपा कर रही है, लेकिन अंतिम फैसला जनता को करना है। 

भाजपा के लिए संगठन, बूथ और चुनावी रणनीति महत्वपूर्ण हैं। लेकिन जनता अपने स्तर पर भी पिछले वर्षों का हिसाब लगाती है। उसके लिए यह मायने रखता है कि उसके आसपास कितना बदलाव आया, कौन सी समस्या दूर हुई और कौन सी समस्या अब भी वहीं खड़ी है।

हल्द्वानी में लोगों की बातचीत में यही बात सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण लगी कि वे किसी राजनीतिक दल के खिलाफ खड़े होने की बात नहीं कर रहे थे। वे अपने शहर के बारे में बात कर रहे थे। उनकी अपेक्षा थी कि चुनावी तैयारी के बीच उनकी समस्याओं को भी उतनी ही गंभीरता से सुना जाए, जितनी गंभीरता से राजनीतिक समीकरणों और चुनावी रणनीति पर चर्चा होती है।