पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के देहरादून दौरे को लेकर भाजपा पर राजनीतिक हमला बोला। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की पहचान उसकी सांस्कृतिक विरासत, सामाजिक सौहार्द और आपसी भाईचारे से है। ऐसे में प्रदेश की राजनीति को विभाजनकारी मुद्दों की ओर ले जाने के बजाय विकास और जनसमस्याओं पर ध्यान देना चाहिए।
बागेश्वर में पत्रकारों से बातचीत के दौरान रावत ने प्रदेश में पलायन, बेरोजगारी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की स्थिति को लेकर धामी सरकार को घेरा। उन्होंने दावा किया कि करीब 15 हजार बाखलियां खंडहर हो चुकी हैं और 200 गांव पूरी तरह खाली होने की स्थिति में पहुंच गए हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि सरकार विकास के दावों के बीच इन गांवों की बदहाल स्थिति का जवाब क्यों नहीं दे रही है।
रावत ने खनन कारोबार, छोटे व्यवसायों और ठेकेदारी से जुड़े रोजगार के अवसरों में कमी का आरोप लगाते हुए सरकार की नीतियों पर सवाल खड़े किए। साथ ही भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर भाजपा से जवाब मांगा। उन्होंने कहा कि गृह मंत्री ने उनके खिलाफ जो आरोप लगाए हैं, उनके प्रमाण सार्वजनिक किए जाने चाहिए। आरोप साबित होने पर वह राजनीति छोड़ने को तैयार हैं। उन्होंने अपने मुख्यमंत्री कार्यकाल के तीन वर्षों के कामकाज पर सार्वजनिक बहस की चुनौती भी दी।
महिला से जुड़े मामलों और प्रदेश की राजनीतिक अस्मिता का जिक्र करते हुए रावत ने रेखा आर्य प्रकरण में कथित 210 करोड़ रुपये की संपत्ति के मामले पर भाजपा नेतृत्व से जवाब मांगा। उन्होंने अंकिता भंडारी प्रकरण को उत्तराखंड की अस्मिता से जुड़ा मुद्दा बताते हुए इसे राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण बताया।
आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर रावत ने कांग्रेस के 45 से अधिक सीटें जीतने के लक्ष्य का जिक्र किया। उन्होंने खानपुर से चुनाव लड़ने की इच्छा भी जताई। साथ ही कहा कि कांग्रेस सामूहिक नेतृत्व में चुनाव मैदान में उतरेगी।



