फोन की दूसरी ओर खुद को जांच एजेंसी का अधिकारी बताने वाला शख्स था। आरोप था कि मोबाइल नंबर का इस्तेमाल आतंकी हमले में हुआ है। गिरफ्तारी और कानूनी कार्रवाई का डर अलग, तीन बच्चों की सुरक्षा को लेकर भी ऐसी आशंकाएं पैदा की गईं कि दंपती किसी से मदद मांगने की हिम्मत तक नहीं जुटा सके। साइबर ठगों ने इसी डर को अपना हथियार बनाया और जांच में सहयोग के नाम पर 45.85 लाख रुपये अपने बताए खातों में जमा करा लिए।
देहरादून के प्रेमनगर क्षेत्र के बिधोली गांव का यह मामला डिजिटल अरेस्ट के नाम पर की जा रही साइबर ठगी के खतरनाक तरीके को उजागर करता है। शिकायत के मुताबिक, ठगों ने खुद को एंटी टेररिस्ट स्क्वॉड (एटीएस) और मुंबई क्राइम ब्रांच का अधिकारी बताया। विजयपाल धीमान और उनकी पत्नी पुष्पा धीमान को लगातार फोन और व्हाट्सएप वीडियो कॉल के जरिए संपर्क में रखा गया। एक कॉल करीब 60 घंटे तक जुड़ी रही। इस दौरान दंपती को दूसरों से बात न करने देने और जांच के नाम पर लगातार दबाव बनाने का आरोप है।
शिकायत के अनुसार, 16 अगस्त के आसपास दंपती के पास फोन आने शुरू हुए। कॉल करने वालों ने मोबाइल नंबर को आतंकी हमले से जोड़कर उन्हें जांच में फंसने का डर दिखाया। इसके बाद उनके तीनों बच्चों की जानकारी लेकर उनकी सुरक्षा को लेकर भी भय पैदा किया गया। घबराए दंपती आरोपियों के निर्देशों का पालन करते रहे।
21 से 27 अगस्त के बीच पांच बार में रकम ट्रांसफर की गई। इसमें चार बार आरटीजीएस के जरिए भुगतान किया गया, जबकि एक बार बैंक शाखा में नकद जमा कराया गया। इस तरह कुल 45.85 लाख रुपये ठगों के बताए खातों तक पहुंच गए। आरोपियों ने बाद में जमीन बेचकर और रकम देने का दबाव भी बनाया।
पांच लेनदेन, कई खातों में पहुंची रकम
शिकायत में दिए गए विवरण के मुताबिक, 15 लाख रुपये सनातन ट्रेडर्स, 11.35 लाख रुपये प्रागज्योतिष एंटरप्राइजेज, 11.50 लाख रुपये इंटीमेटेक्स प्राइवेट लिमिटेड, पांच लाख रुपये शांबा मुराम और तीन लाख रुपये आदित्य संदीप महाराज के नाम से जुड़े खातों में जमा किए गए। इन खातों के वास्तविक संचालकों और कथित ठगी में उनकी भूमिका की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
करीब डेढ़ महीने तक चले इस घटनाक्रम में तीन अक्तूबर को नया मोड़ आया। दंपती की बेटी अचानक घर पहुंची तो उसने माता-पिता को लंबे समय से वीडियो कॉल पर बात करते देखा। पूछताछ होने पर दंपती घबरा गए और कॉल काट दी। इसके बाद आरोपियों की ओर से फोन नहीं आया। दंपती ने आठ अक्तूबर को पुलिस से शिकायत कर रकम वापस दिलाने, संबंधित बैंक खातों को फ्रीज करने और लेनदेन की जांच कराने की मांग की है।
सावधानी: डिजिटल अरेस्ट के नाम पर फोन या वीडियो कॉल के जरिए डराकर पैसे वसूलने की कोशिश हो तो कॉल करने वाले के निर्देशों का पालन करने के बजाय पुलिस या साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 से संपर्क करें।



