देश ही नहीं, विदेशों तक में जिन संत नीम करौली बाबा के लाखों-करोड़ों अनुयायी हैं और जिन्हें उनके भक्त चमत्कारी संत के रूप में श्रद्धा से देखते हैं, उनकी पैतृक संपत्ति को लेकर अब विवाद खड़ा हो गया है। उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद में बाबा के पैतृक मकान और उससे जुड़े पूजा स्थल पर अधिकार को लेकर परिवार और ट्रस्ट आमने-सामने हैं।
मामला फिरोजाबाद की टूंडला तहसील क्षेत्र के अकबरपुर गांव का है, जिसे नीम करौली बाबा की जन्मस्थली बताया जाता है। बाबा के छोटे बेटे धर्म नारायण शर्मा की छह बेटियों ने जिलाधिकारी संतोष शर्मा से शिकायत कर श्री ठाकुर हनुमान जी ट्रस्ट पर पैतृक मकान और पूजा स्थल में दखल का आरोप लगाया है।
परिवार की ओर से प्रशासन को दिए गए शिकायती पत्र में कहा गया है कि पैतृक मकान को ट्रस्ट के नाम दान नहीं किया गया था। इसके बावजूद वहां ट्रस्ट का हस्तक्षेप जारी है। छह नातिनों ने राजस्व और अन्य अभिलेखों के आधार पर पूरे मामले की जांच कराने और यदि संपत्ति पर किसी तरह का अवैध कब्जा या दखल पाया जाता है तो उसे हटाने की मांग की है।
परिवार के मुताबिक नीम करौली बाबा के दो बेटे थे। बड़े बेटे अनके सिंह शर्मा और छोटे बेटे धर्म नारायण शर्मा। अनके सिंह शर्मा के एक बेटा और एक बेटी हैं, जबकि धर्म नारायण शर्मा की छह बेटियां हैं। शिकायत करने वाली छह नातिनें सुनीता शर्मा, अर्चना शर्मा, वंदना शर्मा, भावना रावत, रितु तिवारी और रिचा रावत हैं।
हालांकि, दूसरी तरफ ट्रस्ट ने परिवार के आरोपों को पूरी तरह गलत बताया है। श्री ठाकुर हनुमान जी ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष मनोज अग्रवाल का कहना है कि बाबा का घर, मंदिर और डाक बंगला कानूनी तौर पर ट्रस्ट को दिए गए हैं। ट्रस्ट के अनुसार बाबा की पत्नी रामबेटी ने वर्ष 1996 में श्री ठाकुर हनुमान जी ट्रस्ट का गठन किया था।
ट्रस्ट का कहना है कि वर्तमान में इसमें 18 सदस्य हैं और बाबा की बेटी गिरजा भटेले इसकी अध्यक्ष हैं। ट्रस्ट के मुताबिक धार्मिक स्थल और उससे जुड़ी संपत्तियों का संचालन सेवा भाव से किया जा रहा है और बाबा की किसी संपत्ति का निजी इस्तेमाल नहीं किया जा रहा।
विवाद के बीच प्रशासन ने भी मामले को गंभीरता से लिया है। जिलाधिकारी संतोष शर्मा के अनुसार अकबरपुर गांव नीम करौली बाबा की जन्मस्थली है और यहां श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए सरकार की कई परियोजनाओं पर काम चल रहा है। उन्होंने कहा कि यह धार्मिक स्थल है और इससे लोगों की भावनाएं जुड़ी हैं। बाबा की जन्मस्थली को बेहतर पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की योजनाओं पर भी काम हो रहा है।
अब निगाह प्रशासन की जांच पर है। पैतृक संपत्ति वास्तव में किसके नाम है, क्या उसे ट्रस्ट को विधिवत हस्तांतरित किया गया था और ट्रस्ट के पास अपने दावे के समर्थन में कौन से कानूनी दस्तावेज हैं—इन सवालों का जवाब राजस्व एवं अन्य अभिलेखों की जांच के बाद ही सामने आएगा।
नीम करौली बाबा की लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि भारत के साथ-साथ विदेशों में भी उनके अनुयायी हैं। उत्तराखंड के नैनीताल जिले में भी बाबा से जुड़ा मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। ऐसे में उनकी जन्मस्थली और पैतृक संपत्ति से जुड़ा यह विवाद अब इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि मामला एक ऐसे संत की विरासत से जुड़ा है, जिनके प्रति देश-दुनिया में बड़ी संख्या में लोगों की गहरी आस्था है।
फिलहाल परिवार का आरोप अपनी जगह है और ट्रस्ट का दावा अपनी जगह। अंतिम तस्वीर प्रशासनिक जांच और उपलब्ध कानूनी दस्तावेजों से ही साफ होगी।



