
कहानी की शुरुआत एक ऐसे प्लान से हुई, जिसमें पैसा आने का समय पहले से पता था और एटीएम के आसपास नजर रखने की जिम्मेदारी एक युवती को दी गई थी। पुलिस के मुताबिक, मकसद था बड़ी रकम हाथ लगाना और प्रेमी के कर्ज को खत्म करना। प्लान तैयार था, किरदार तय थे और इंतजार था सिर्फ उस पल का जब एटीएम में नकदी पहुंचे। लेकिन जिस योजना को बेहद सोच-समझकर तैयार किया गया था, उसकी एक कड़ी आखिरकार पुलिस तक पहुंच गई।
14 सितंबर की सुबह जयपुर के रामनगरिया इलाके में बैंक ऑफ इंडिया के एटीएम में नकदी डाली जानी थी। पुलिस के अनुसार, करौली निवासी मस्तराम मीणा को पहले ही इस बात की जानकारी मिल चुकी थी कि एटीएम में बड़ी रकम पहुंचने वाली है। यह जानकारी उसे बैंक से जुड़े एक कर्मचारी के संपर्क के जरिए मिलने की बात पुलिस जांच में सामने आई है। इसी के बाद कथित तौर पर लूट की योजना तैयार हुई।
पुलिस के मुताबिक, मस्तराम ने अपनी प्रेमिका अंशु को भी योजना में शामिल किया। उसका काम था एटीएम पर नजर रखना। पुलिस का कहना है कि अंशु को वारदात से एक दिन पहले भी वहां भेजा गया था, ताकि एटीएम की स्थिति देखी जा सके।
सुबह करीब साढ़े दस बजे बैंक के तीन कर्मचारी नकदी लेकर एटीएम पहुंचे। पुलिस के अनुसार, अंशु पहले से आसपास मौजूद थी। जैसे ही कर्मचारियों के पहुंचने की जानकारी हुई, उसने कथित तौर पर मस्तराम को फोन कर दिया।
पुलिस के मुताबिक, सूचना मिलते ही दो आरोपी बाइक से बैंक की ओर पहुंचे, जबकि एक साथी कुछ दूरी पर कार लेकर मौजूद था। कर्मचारियों को कथित तौर पर धमकाकर एटीएम के लिए लाई गई 41.70 लाख रुपये की नकदी लूट ली गई।
पुलिस जांच के अनुसार, आरोपियों ने वारदात के बाद भी बच निकलने की तैयारी कर रखी थी। लूट की रकम अलग-अलग हिस्सों में रखने की बात सामने आई। पुलिस का कहना है कि 26.80 लाख रुपये एक सूटकेस में रखकर अंशु के किराये के कमरे तक पहुंचाए गए, जबकि बाकी रकम दूसरे आरोपियों के पास चली गई।
करीब एक हजार कैमरों की फुटेज जांचे जाने की बात सामने आई है। इसी दौरान एक युवती की गतिविधियां पुलिस के संदेह के घेरे में आईं। कड़ियां जोड़ी गईं तो जांच अंशु तक पहुंची। इसके बाद पुलिस उसके किराये के कमरे तक पहुंची।
अंशु ने मस्तराम मीणा और उसके दो साथियों पुष्पेंद्र मीणा व सुमित जंगम के साथ मिलकर कथित तौर पर साजिश रची थी। मस्तराम समेत तीन आरोपी फिलहाल फरार बताए जा रहे हैं। शुरुआती जांच में पुलिस को यह भी पता चला कि आरोपियों पर कर्ज था और कथित तौर पर इसी कर्ज से निकलने के लिए इतनी बड़ी रकम लूटने की योजना बनाई गई थी।




