
राजकीय उप जिला चिकित्सालय ऋषिकेश में एक नवजात को उसकी मां के अस्पताल से चले जाने के बाद उपचार के लिए भर्ती रखा गया, लेकिन पांच सितंबर को उसकी मौत हो गई। महिला प्रसव के बाद अपने बच्चे को वार्ड में छोड़कर चली गई थी। अस्पताल प्रशासन की सूचना पर पुलिस महिला की तलाश कर रही है।
अस्पताल प्रशासन के मुताबिक, एक सितंबर को एक महिला प्रसव पीड़ा की स्थिति में अस्पताल पहुंची थी। उसके साथ एक पुरुष भी था। दोनों ने खुद को पति-पत्नी बताया और बिहार का रहने वाला बताया। अस्पताल में भर्ती की प्रक्रिया के दौरान स्टाफ ने दोनों से पहचान संबंधी दस्तावेज मांगे, लेकिन उन्होंने दस्तावेज उपलब्ध नहीं होने की बात कही।
महिला की हालत को देखते हुए चिकित्सकों ने उसे अस्पताल में भर्ती कर लिया। चिकित्सकीय देखरेख में उसका प्रसव कराया गया। बच्चे के जन्म के बाद चिकित्सकों ने पाया कि नवजात की हालत गंभीर थी और उसे सांस लेने में परेशानी हो रही थी। अस्पताल की ओर से इसकी जानकारी महिला और उसके साथ आए व्यक्ति को दी गई थी।
अस्पताल प्रशासन के अनुसार, नवजात को लगातार उपचार और निगरानी में रखा गया। बताया गया कि प्रसव के करीब दो दिन बाद तीन सितंबर को महिला अस्पताल के वार्ड से अपने नवजात बच्चे को वहीं छोड़कर चली गई। काफी देर तक उसके वापस नहीं लौटने पर अस्पताल कर्मचारियों को इसकी जानकारी हुई। अस्पताल प्रशासन ने मामले की सूचना उसी दिन ऋषिकेश कोतवाली पुलिस को दे दी। इसके बाद पुलिस ने महिला की तलाश शुरू कर दी।
मां के चले जाने के बावजूद अस्पताल ने नवजात को उपचार से वंचित नहीं किया। उसकी नाजुक हालत को देखते हुए चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों ने उसका इलाज जारी रखा। हालांकि, बच्चे की स्थिति में सुधार नहीं हो सका। पांच सितंबर को नवजात ने अस्पताल में दम तोड़ दिया। बच्चे की मौत की सूचना भी पुलिस को दे दी गई है।




