
उत्तराखंड में वाहन चलाने वालों के लिए मोटर वाहन कानून की व्यवस्था जल्द बदल सकती है। केंद्र स्तर पर किए गए संशोधनों को प्रदेश में लागू करने की तैयारी शुरू हो गई है। परिवहन मुख्यालय ने नए प्रावधान लागू करने के लिए शासन को प्रस्ताव भेज दिया है। शासन की मंजूरी के बाद अधिसूचना जारी होगी और इसके साथ ही प्रदेश में संशोधित व्यवस्था प्रभावी हो सकेगी।
मौजूदा व्यवस्था में मोटर यान अधिनियम से जुड़े 34 प्रावधान प्रभावी हैं। केंद्रीय संशोधन के बाद इनमें से 20 प्रावधान समाप्त किए गए हैं, जबकि 14 नए प्रावधानों को लागू किया जाना है। फिलहाल उत्तराखंड में पुराने नियमों के आधार पर ही कार्रवाई की जा रही है।
नए नियमों को प्रदेश में लागू करने के लिए परिवहन विभाग की ओर से प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई है। शासन की स्वीकृति और अधिसूचना जारी होने के बाद ही यातायात पुलिस और परिवहन विभाग संशोधित प्रावधानों के अनुसार कार्रवाई कर सकेंगे।
संशोधित व्यवस्था में सड़क सुरक्षा को प्राथमिकता दी गई है। तेज गति से वाहन चलाने समेत यातायात नियमों के उल्लंघन पर आर्थिक दंड से जुड़े प्रावधानों को नए सिरे से लागू किया जाना है।
हादसे के बाद भागना पड़ेगा भारी
दुर्घटना के बाद चालक के मौके से चले जाने यानी हिट एंड रन के मामलों में भी जिम्मेदारी और कार्रवाई से जुड़े प्रावधानों को अधिक प्रभावी बनाया गया है। पीड़ित को सहायता उपलब्ध कराने और चालक की जवाबदेही तय करने पर जोर दिया गया है।
मोबाइल या डिजिटल माध्यम से यात्रियों को वाहन उपलब्ध कराने वाली सेवाओं को भी संशोधित व्यवस्था के तहत नियमन के दायरे में रखा गया है। ऐसी सेवाओं के लिए निर्धारित मानकों और लाइसेंस संबंधी नियमों का पालन जरूरी होगा।
वाहन चालक के लाइसेंस से संबंधित नियमों में भी बदलाव किया गया है। संशोधित प्रावधान लागू होने के बाद लाइसेंस संबंधी उल्लंघनों पर नए नियमों के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
बड़ा बदलाव एक नजर में
- 34 मौजूदा प्रभावी प्रावधान
- 20 पुराने प्रावधान हटाए गए
- 14 नए प्रावधान लागू होंगे
- शासन को प्रस्ताव भेजा जा चुका है
- अधिसूचना के बाद नई व्यवस्था प्रभावी होगी
- अभी लागू नहीं हुए नए नियम
केंद्रीय स्तर पर संशोधन होने के बावजूद उत्तराखंड में इन प्रावधानों को अभी लागू नहीं किया गया है। जब तक शासन से मंजूरी और अधिसूचना जारी नहीं होती, तब तक विभागीय कार्रवाई पुरानी व्यवस्था के तहत ही जारी रहेगी।
किन मामलों पर रहेगा ज्यादा असर?
- वाहन चालक → तेज रफ्तार और अन्य यातायात उल्लंघन
- दुर्घटना के मामले → हादसे के बाद मौके से चले जाना
- लाइसेंस → लाइसेंस संबंधी नियमों का उल्लंघन
- यात्री वाहन सेवाएं → डिजिटल माध्यम से वाहन उपलब्ध कराने वाली सेवाएं
हिट एंड रन पर विशेष जोर
संशोधित प्रावधानों में दुर्घटना के बाद चालक की जिम्मेदारी और पीड़ित को सहायता देने से संबंधित व्यवस्था को महत्वपूर्ण बनाया गया है। इसका उद्देश्य सड़क दुर्घटनाओं के मामलों में जवाबदेही को अधिक स्पष्ट करना है।
संशोधित व्यवस्था में कुछ ऐसे पुराने प्रावधानों में भी बदलाव किया गया है, जिनमें जेल भेजे जाने जैसे कड़े दंड का प्रावधान था। नई व्यवस्था में कुछ मामलों में इन प्रावधानों को शिथिल किया गया है।
अपर परिवहन आयुक्त एसके सिंह के अनुसार, संशोधित प्रावधानों को लागू करने के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा गया है। फिलहाल पुराने प्रावधानों के आधार पर कार्रवाई हो रही है। शासन की अधिसूचना जारी होने के बाद नए नियमों के अनुसार प्रवर्तन कार्रवाई शुरू की जाएगी।
अभी वाहन चालकों पर पुराने नियम ही लागू हैं। इसलिए केवल केंद्रीय स्तर पर संशोधन होने से उत्तराखंड में तत्काल नई दर या नया दंड लागू नहीं माना जाएगा। प्रदेश में अधिसूचना जारी होने के बाद ही नई व्यवस्था प्रभावी होगी।




