हल्द्वानी। पर्वतीय सांस्कृतिक उत्थान मंच के तत्वावधान में आयोजित उत्तरायणी मेला (घुघुतिया त्यार) गुरुवार को रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों और पुरस्कार वितरण के साथ उल्लासपूर्ण वातावरण में संपन्न हो गया। मेले के अंतिम दिन खेल प्रतियोगिताओं के साथ-साथ लोकसंस्कृति से जुड़े कार्यक्रमों ने दर्शकों को पूरे दिन बांधे रखा। बड़ी संख्या में पहुंचे लोगों ने कुमाऊंनी लोकधुनों और पारंपरिक प्रस्तुतियों का आनंद लिया।
समापन समारोह से पूर्व विभिन्न प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों को मंच से पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया। इसके बाद सांस्कृतिक कार्यक्रमों की कड़ी शुरू हुई, जिसमें लोक कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों से मंच को जीवंत कर दिया। लोकगायिका बबीता देवी ने “क्ये भालो लगे सो मेरे पहाड़ा”, “बनी-बनी का”, “सनाया का बार त्यौहार” और “खास से कटे लूं, सुबह में खोली-खोली मां” जैसे कुमाऊंनी गीतों से श्रोताओं की खूब वाहवाही लूटी।
वहीं लोकगायक रोशन बनोला ने “अल्मोड़ा की नंदा मां”, “ऐजा मेरा दानपुरा”, “संती छोरी” और “काछू तेरो जलेबी को डाब” के साथ न्योली, छपेली, झोड़ा और चांचड़ी प्रस्तुत कर लोगों को झूमने पर मजबूर कर दिया। पारंपरिक लोकनृत्यों और गीतों ने उत्तरायणी मेले की सांस्कृतिक पहचान को और सशक्त किया।
मेले के दौरान निकाली गई शोभायात्रा में शामिल आकर्षक और पारंपरिक झांकियों को भी पुरस्कृत किया गया। आयोजकों ने अगले वर्ष उत्तरायणी महोत्सव को और अधिक भव्य, दिव्य और व्यापक स्वरूप देने का संकल्प लिया।
इस अवसर पर मंच के संरक्षक हुकुम सिंह कुंवर, अध्यक्ष खड़क सिंह बगड़वाल, उपाध्यक्ष गोपाल सिंह बिष्ट, सचिव देवेंद्र तोलिया, कोषाध्यक्ष त्रिलोक बनोली सहित मंच के पदाधिकारी, जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में नगरवासी उपस्थित रहे।

