उत्तराखंड में शिक्षा का उत्सव: ‘स्कूल चलो अभियान’ के तहत 67 हजार से अधिक बच्चों का दाखिला

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हल्द्वानी। नए शैक्षिक सत्र की शुरुआत के साथ उत्तराखंड में शिक्षा का उत्सव देखने को मिला। विद्यालयी शिक्षा विभाग द्वारा चलाए जा रहे ‘स्कूल चलो अभियान’ के अंतर्गत प्रदेशभर के राजकीय और अशासकीय विद्यालयों में प्रवेशोत्सव कार्यक्रम बड़े ही उत्साह और उमंग के साथ मनाया गया। इस अवसर पर कक्षा 1 से 12वीं तक 67,815 नए छात्र-छात्राओं ने स्कूलों में कदम रखा, जिससे विद्यालय परिसरों में रौनक लौट आई।

नवप्रवेशित बच्चों का पारंपरिक तरीके से स्वागत किया गया। कहीं फूल-मालाओं से अभिनंदन हुआ तो कहीं तिलक लगाकर बच्चों का उत्साह बढ़ाया गया। इस दौरान उन्हें निःशुल्क पाठ्यपुस्तकें भी वितरित की गईं, जिससे उनके चेहरे पर नई शुरुआत की खुशी साफ झलक रही थी।

कार्यक्रम का शुभारंभ विद्यालयी शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने वर्चुअल माध्यम से किया। उन्होंने बच्चों से संवाद करते हुए उन्हें मन लगाकर पढ़ाई करने और अपने भविष्य को संवारने के लिए प्रेरित किया।

शिक्षा विभाग के आंकड़ों पर नजर डालें तो सबसे ज्यादा उत्साह प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्तर पर देखने को मिला। प्राथमिक स्तर पर 24,381, उच्च प्राथमिक में 31,008 और माध्यमिक स्तर पर 12,426 छात्र-छात्राओं ने प्रवेश लिया। कक्षा 1 में अकेले 20,405 बच्चों का दाखिला इस अभियान की सफलता को दर्शाता है, वहीं कक्षा 6 में भी 28,676 बच्चों का नामांकन हुआ।

जिलेवार आंकड़ों में राजधानी देहरादून सबसे आगे रहा, जहां 9,113 बच्चों ने प्रवेश लिया। हरिद्वार, नैनीताल, चमोली और अल्मोड़ा जैसे जिलों में भी अच्छी संख्या में नामांकन हुआ। हालांकि, टिहरी गढ़वाल में अपेक्षाकृत कम 2,515 बच्चों ने दाखिला लिया, जो विभाग के लिए चिंतन का विषय भी है।

इस मौके पर शिक्षा मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य हर बच्चे तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुंचाना है। नई शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप स्कूलों में आधुनिक सुविधाएं, डिजिटल शिक्षा और बेहतर शैक्षणिक वातावरण तैयार किया जा रहा है। साथ ही शिक्षकों की कमी दूर करने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।

उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि ‘स्कूल चलो अभियान’ को केवल कार्यक्रम तक सीमित न रखें, बल्कि इसे जनआंदोलन का रूप दें। इसके लिए शिक्षकों और विभागीय कर्मचारियों को घर-घर जाकर अभिभावकों को जागरूक करना होगा, ताकि कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रह जाए।

प्रदेश में इस तरह के सामूहिक प्रयासों से शिक्षा के क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव की उम्मीद और मजबूत हुई है। प्रवेशोत्सव ने न केवल बच्चों के लिए नई शुरुआत का रास्ता खोला है, बल्कि यह संदेश भी दिया है कि शिक्षा ही उज्ज्वल भविष्य की सबसे मजबूत नींव है।