हल्द्वानी। जज फार्म निवासी एवं मूल रूप से बागेश्वर जनपद की कमस्यार घाटी के नरगोली गांव के रहने वाले, भारत-पाक युद्धों के वीर योद्धा कर्नल हरीश रौतेला की अस्थियों का विसर्जन शनिवार, 20 दिसंबर को रानीबाग स्थित चित्रशीला घाट में किया गया।
कर्नल हरीश रौतेला ने पाकिस्तान के साथ 1965 और 1971 में हुए युद्धों में सक्रिय रूप से भाग लिया। वर्ष 1971 के भारत-पाक युद्ध में अदम्य साहस और वीरता का परिचय देने पर उन्हें राष्ट्रपति द्वारा सेना मेडल से सम्मानित किया गया था। उनके सम्मान में पाकिस्तान सीमा से सटे गुरकी गांव का नाम बदलकर “हरीश नगर” रखा गया। उन्होंने अपने शौर्य और राष्ट्रभक्ति से भारतीय सैन्य इतिहास में एक अमिट अध्याय जोड़ा, जो सदैव स्मरणीय रहेगा।
उल्लेखनीय है कि कर्नल रौतेला पिछले कुछ समय से अपने बड़े पुत्र सुखेंदु रौतेला के साथ बेंगलुरु में रह रहे थे। उम्र संबंधी स्वास्थ्य समस्याओं के चलते उन्हें बेंगलुरु के मणिपाल अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उपचार के दौरान 16 दिसंबर को उनका निधन हो गया। उनका अंतिम संस्कार 18 दिसंबर को बेंगलुरु में पूर्ण सैन्य सम्मान के साथ किया गया। इस अवसर पर 8 गढ़वाल राइफल्स और सीओएजी द्वारा उन्हें सैन्य सलामी देकर अंतिम विदाई दी गई।
उनकी अंतिम इच्छा के अनुरूप शनिवार को चित्रशीला घाट में उनके बड़े पुत्र सुखेंदु रौतेला एवं छोटे पुत्र राघवेंद्र रौतेला ने विधि-विधान से अस्थि विसर्जन किया। यह धार्मिक अनुष्ठान पुरोहित शिवदत्त जोशी द्वारा संपन्न कराया गया।

अस्थि विसर्जन के दौरान उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करने वालों में इतिहासकार प्रो. अजय रावत, प्रो. आनंद सिंह रौतेला, दान सिंह रौतेला, सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य कैलाश रौतेला, वरिष्ठ पत्रकार जगमोहन रौतेला, द्वाराहाट इंजीनियरिंग कॉलेज के पूर्व प्रधानाचार्य डॉ. रमेश चंद्र सिंह मेहता, शोभा रावत, शंकर रौतेला, सुरेंद्र रौतेला, अशोक रौतेला, सुशील रौतेला, निक्कू रौतेला और चिरंजीवी रौतेला सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
कर्नल हरीश रौतेला का जन्म 29 जनवरी 1937 को नरगोली गांव में हुआ। उनकी माता विशनुली रौतेला तथा पिता हयात सिंह रौतेला थे, जो ब्रिटिश आर्मी में सुबेदार रहे। हयात सिंह रौतेला ने द्वितीय विश्व युद्ध में ब्रिटिश सेना की ओर से कई मोर्चों पर लड़ते हुए अद्वितीय वीरता का प्रदर्शन किया, जिसके लिए उन्हें “जंगी” की उपाधि से सम्मानित किया गया था।
कर्नल हरीश रौतेला की शिक्षा किंग जॉर्ज रॉयल मिलिट्री स्कूल, जालंधर में हुई। वे चार भाइयों दान सिंह, मनोहर सिंह और आनंद सिंह में सबसे बड़े थे। वर्ष 1962 में उन्होंने सेना में कमीशन प्राप्त किया और 8 गढ़वाल राइफल्स में उनकी नियुक्ति हुई। 1965 में वे मेजर बने और वे कांडा-कमस्यार क्षेत्र के आजादी के बाद प्रथम सैन्य अधिकारी थे।
उन्होंने 1988 में कर्नल पद से सेवानिवृत्ति ली। सैन्य सेवा के दौरान उत्कृष्ट कार्यों के लिए उन्हें फील्ड मार्शल सैम मानेकशॉ, सेनाध्यक्ष जनरल थिमैया और सेनाध्यक्ष जनरल वैद्य द्वारा सम्मानित किया गया। देशभक्ति, साहस और अनुशासन के प्रतीक कर्नल हरीश रौतेला को भावपूर्ण श्रद्धांजलि। उनका जीवन आने वाली पीढ़ियों के लिए सदैव प्रेरणास्रोत बना रहेगा।

