रुद्रपुर। उत्तराखंड में जमीन विवादों को लेकर पहले से ही चर्चा में रहने वाले गदरपुर विधायक और पूर्व कैबिनेट मंत्री अरविंद पांडे की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ती नजर आ रही हैं। इस बार मामला सीधे उनके कैंप कार्यालय से जुड़ा है, जिसे तहसील प्रशासन ने राजकीय भूमि पर अवैध अतिक्रमण मानते हुए 15 दिनों के भीतर हटाने का नोटिस जारी कर दिया है।
तहसील प्रशासन की टीम गूलरभोज स्थित विधायक के आवास पर पहुंची, जहां उनके पुत्र अतुल पांडे को विधिवत नोटिस सौंपा गया। नोटिस मिलते ही यह मामला राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है।
हाईकोर्ट के आदेश से जुड़ा मामला
नोटिस में नैनीताल हाईकोर्ट में दायर याचिका संख्या 192/2024 (एमएस) – सुनील यादव बनाम उत्तराखंड सरकार का हवाला दिया गया है। हाईकोर्ट के 26 दिसंबर 2024 के आदेश के अनुपालन में की गई जांच में यह पाया गया कि गूलरभोज क्षेत्र के खाता संख्या 64, खसरा संख्या 12 ग, रकबा 0.158 हेक्टेयर की भूमि, जो श्रेणी 5-1 (नई परती) में दर्ज है, पर अवैध अतिक्रमण किया गया है।
जांच रिपोर्ट के अनुसार यह भूमि दो रास्तों के बीच स्थित है, जहां एक ओर सिंचाई विभाग की नहर भी गुजरती है। प्रशासन का दावा है कि इसी भूमि पर विधायक का कैंप कार्यालय बनाया गया है और अतिक्रमणकर्ता के रूप में अरविंद पांडे का नाम दर्ज किया गया है।

‘जवाब कोर्ट में देंगे’
नोटिस पर प्रतिक्रिया देते हुए विधायक के बेटे अतुल पांडे ने कहा “यह ईमानदारी का नतीजा है कि प्रशासन ने नोटिस दिया है। यदि जवाब देना है तो वह कोर्ट में ही दिया जाएगा।”
समर्थकों ने उठाए सवाल
वहीं दूसरी ओर विधायक के समर्थक प्रशासनिक कार्रवाई को राजनीतिक साजिश करार दे रहे हैं। उनका कहना है कि जिस भूमि को अतिक्रमण बताया जा रहा है, वह वर्षों से बंजर पड़ी थी और पिछले 10 वर्षों से वहां कैंप कार्यालय संचालित है। समर्थकों के अनुसार इसी कार्यालय में पूर्व में कई प्रशासनिक अधिकारियों के साथ बैठकें भी होती रही हैं।
समर्थकों का आरोप है कि अचानक अतिक्रमण का मामला उठाना, हाल के दिनों में चल रहे घटनाक्रम का ही हिस्सा है और आगे भी विधायक को घेरने के लिए नए मामले सामने आ सकते हैं।
राजनीतिक तापमान चढ़ा
प्रशासन के नोटिस के बाद गदरपुर की राजनीति गरमा गई है। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि तय 15 दिनों की अवधि में क्या कदम उठाए जाते हैं और कोर्ट में यह मामला किस मोड़ पर पहुंचता है।

