बदरीनाथ धाम में चढ़ावे में कथित हेराफेरी के खुलासे ने सुरक्षा व्यवस्था की परतें भी खोल दी हैं। जिस धाम की सुरक्षा मजबूत करने के लिए दो साल पहले 57 पद स्वीकृत किए गए थे, वहां आज तक नियुक्तियां नहीं हो सकीं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था और मंदिर की संपत्ति की सुरक्षा आखिर किसके भरोसे है?
हाल ही में बदरीनाथ धाम में दान-चढ़ावे की गणना के दौरान कथित हेराफेरी का मामला सामने आया। आरोप है कि चढ़ावे की रकम में गड़बड़ी की गई, जिसके बाद एक कर्मचारी को गिरफ्तार किया गया। जांच में कई अन्य कर्मचारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में बताई जा रही है। इस घटना के बाद मंदिर की सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठने लगे।
चढ़ावा हेराफेरी के मामले के बीच अब यह सामने आया है कि बदरीनाथ धाम के लिए वर्ष 2024 में स्वीकृत 57 सुरक्षा पद आज भी खाली पड़े हैं। इन पदों पर नियुक्तियां हो जातीं तो मंदिर में सुरक्षा, दर्शन व्यवस्था, दान-चढ़ावे की निगरानी और मंदिर की संपत्तियों की सुरक्षा के लिए एक अलग और प्रशिक्षित सुरक्षा तंत्र तैयार हो चुका होता।
योजना के तहत डीएसपी, इंस्पेक्टर और सब-इंस्पेक्टर स्तर के अधिकारियों के साथ मंदिर रक्षक और मुख्य मंदिर रक्षक के पद भी स्वीकृत किए गए थे। वरिष्ठ अधिकारियों की तैनाती प्रतिनियुक्ति से और मंदिर रक्षकों की भर्ती आउटसोर्सिंग के माध्यम से होनी थी, लेकिन प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी।
वर्तमान में बदरी-केदार मंदिर समिति के अधीन आने वाले मंदिरों में सुरक्षा व्यवस्था सीमित संसाधनों पर टिकी हुई है। ऐसे में चढ़ावा हेराफेरी जैसी घटना ने यह सवाल और बड़ा कर दिया है कि यदि पहले से स्वीकृत सुरक्षा ढांचा समय पर खड़ा कर दिया गया होता, तो क्या ऐसी घटनाओं को रोका जा सकता था?
हर वर्ष लाखों श्रद्धालु बदरीनाथ धाम पहुंचते हैं। इतनी बड़ी संख्या में आने वाले श्रद्धालुओं, मंदिर की संपत्तियों और दान-चढ़ावे की सुरक्षा के लिए मजबूत सुरक्षा तंत्र की जरूरत लंबे समय से महसूस की जा रही है।
अब निगाहें इस बात पर हैं कि शासन और मंदिर समिति स्वीकृत 57 पदों पर नियुक्ति की प्रक्रिया कब शुरू करते हैं। क्योंकि आस्था के सबसे बड़े केंद्रों में से एक बदरीनाथ धाम में सुरक्षा व्यवस्था का मजबूत होना केवल प्रशासनिक आवश्यकता नहीं, बल्कि श्रद्धालुओं के विश्वास से भी जुड़ा विषय है।


