महाराष्ट्र के कल्याण रेलवे स्टेशन पर प्लेटफॉर्म टिकट की वैधता को लेकर एक मामला चर्चा का विषय बन गया है। एक युवक अपनी परिवार के सदस्यों को ट्रेन में बैठाने स्टेशन पहुंचा था। जानकारी के अनुसार, जिस ट्रेन से परिजनों को यात्रा करनी थी वह कई घंटे विलंब से चल रही थी। इस दौरान युवक स्टेशन परिसर में ही रुका रहा।
बताया जा रहा है कि जांच के दौरान टिकट निरीक्षक (टीटीई) ने युवक से प्लेटफॉर्म टिकट दिखाने को कहा। टिकट देखने पर पाया गया कि उसकी वैधता अवधि समाप्त हो चुकी थी। इसके बाद रेलवे नियमों के तहत उस पर जुर्माना लगाया गया। युवक का कहना है कि ट्रेन रेलवे की वजह से लेट थी, इसलिए उसे अतिरिक्त समय तक स्टेशन पर रुकना पड़ा और ऐसे में जुर्माना लगाना उचित नहीं है।
क्या कहते हैं रेलवे के नियम?
भारतीय रेलवे के अनुसार प्लेटफॉर्म टिकट केवल सीमित अवधि के लिए मान्य होता है। सामान्य तौर पर यह टिकट स्टेशन परिसर में प्रवेश और यात्रियों को छोड़ने या लेने के उद्देश्य से जारी किया जाता है। निर्धारित समय समाप्त होने के बाद व्यक्ति को स्टेशन परिसर छोड़ना होता है। यदि कोई व्यक्ति बिना वैध टिकट के प्लेटफॉर्म या स्टेशन क्षेत्र में पाया जाता है तो रेलवे अधिनियम के तहत उससे जुर्माना वसूला जा सकता है।
रेलवे अधिनियम में क्या प्रावधान हैं?
रेलवे अधिनियम, 1989 की धारा 138 के अनुसार यदि कोई व्यक्ति बिना वैध टिकट रेलवे परिसर में पाया जाता है तो उससे किराया और अतिरिक्त शुल्क या जुर्माना वसूला जा सकता है। टिकट की वैधता समाप्त होने के बाद उसे वैध यात्रा या प्लेटफॉर्म टिकट नहीं माना जाता।
इस घटना के बाद सोशल मीडिया पर लोगों की राय बंटी हुई है। कुछ लोगों का कहना है कि टीटीई ने नियमों के अनुसार कार्रवाई की, इसलिए उसे गलत नहीं कहा जा सकता। वहीं दूसरे पक्ष का तर्क है कि जब ट्रेन कई घंटे देरी से चल रही थी तो यात्री को मजबूरी में स्टेशन पर रुकना पड़ा, ऐसे में मानवीय दृष्टिकोण अपनाया जाना चाहिए था।
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यात्रियों को क्या करना चाहिए?
रेलवे विशेषज्ञों का कहना है कि यदि ट्रेन काफी देर से लेट हो और किसी कारणवश स्टेशन पर अधिक समय रुकना पड़े, तो प्लेटफॉर्म टिकट की वैधता और स्थानीय नियमों की जानकारी अवश्य लेनी चाहिए। विवाद की स्थिति में यात्री रेल मदद, स्टेशन प्रबंधक या मंडल रेल प्रबंधक कार्यालय में शिकायत दर्ज करा सकते हैं और लिखित जवाब मांग सकते हैं।
यह मामला एक बार फिर रेलवे नियमों और यात्रियों की व्यावहारिक परेशानियों के बीच संतुलन बनाने की जरूरत को सामने लाता है। नियमों का पालन जरूरी है, लेकिन यात्रियों की परिस्थितियों को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

