छत्तीसगढ़। छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले से मानवता, पारिवारिक जिम्मेदारी और सरकारी व्यवस्थाओं की जमीनी हकीकत को उजागर करने वाली एक मार्मिक तस्वीर सामने आई है। यहां एक आदिवासी महिला ने अपनी 90 वर्षीय सास की लंबित पेंशन दिलाने के लिए उन्हें पीठ पर लादकर करीब तीन किलोमीटर का पैदल सफर तय किया और बैंक पहुंची। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद शासन-प्रशासन की व्यवस्थाओं पर भी सवाल खड़े होने लगे हैं।
मामला मैनपाट विकासखंड के जंगलपाड़ा गांव का है। गांव निवासी सुखमनिया अपनी वृद्ध सास को प्रतिमाह मिलने वाली 500 रुपये की सामाजिक सुरक्षा पेंशन दिलाने के लिए बैंक पहुंचीं। केवाईसी (KYC) संबंधी औपचारिकताएं पूरी नहीं होने के कारण पिछले चार माह से पेंशन का भुगतान रुका हुआ था। आर्थिक रूप से कमजोर परिवार के सामने पेंशन ही जीवनयापन का सहारा थी।
बताया गया कि पहले बैंक मित्र घर पहुंचकर पेंशन राशि उपलब्ध कराते थे, लेकिन केवाईसी अपडेट न होने के कारण यह सुविधा बंद हो गई। ऐसे में 22 मई को सुखमनिया अपनी 90 वर्षीय सास को पीठ पर लादकर लगभग तीन किलोमीटर दूर मैनपाट स्थित सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया शाखा तक पैदल पहुंचीं। बैंक में आवश्यक दस्तावेजी प्रक्रिया पूरी होने के बाद चार माह की लंबित पेंशन राशि दो हजार रुपये जारी कर दी गई।
मैनपाट जनपद पंचायत की मुख्य कार्यपालन अधिकारी खुशबू शास्त्री के अनुसार, जनवरी में अंतिम बार वृद्ध महिला को घर पर पेंशन पहुंचाई गई थी। केवाईसी प्रक्रिया लंबित रहने के कारण भुगतान बाधित हुआ था। अब औपचारिकताएं पूरी हो चुकी हैं और अगले माह से पुनः घर पर पेंशन उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जाएगी।
व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल
घटना ने ग्रामीण क्षेत्रों में बुजुर्गों और दिव्यांगों को मिलने वाली सरकारी सेवाओं की पहुंच को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि बैंक मित्र और प्रशासनिक तंत्र सक्रिय होता तो 90 वर्षीय महिला को इस उम्र में बैंक जाने की आवश्यकता नहीं पड़ती। सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का उद्देश्य जरूरतमंदों तक सुविधाएं उनके द्वार तक पहुंचाना है, लेकिन एक वृद्ध महिला को पेंशन के लिए बहू की पीठ पर बैठकर कई किलोमीटर का सफर तय करना पड़ा, जो व्यवस्था की संवेदनशीलता पर प्रश्नचिह्न लगाता है।
ग्रामीणों का कहना है कि दूरस्थ आदिवासी क्षेत्रों में बैंकिंग सेवाओं और दस्तावेजी प्रक्रियाओं को सरल बनाने की आवश्यकता है, ताकि बुजुर्गों, असहाय और अशक्त लोगों को इस तरह की परेशानियों का सामना न करना पड़े।
मानवीय रिश्ते की मिसाल बनी बहू
एक ओर जहां यह घटना प्रशासनिक तंत्र की कमियों को उजागर करती है, वहीं दूसरी ओर सुखमनिया ने अपनी सास के प्रति समर्पण और सेवा भाव की ऐसी मिसाल पेश की है, जिसने लोगों का दिल जीत लिया है। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में लोग बहू की संवेदनशीलता और त्याग की सराहना कर रहे हैं।
यह घटना सिर्फ एक परिवार की परेशानी नहीं, बल्कि उन चुनौतियों का आईना है जिनका सामना आज भी देश के दूरदराज ग्रामीण इलाकों में रहने वाले बुजुर्गों को सरकारी योजनाओं का लाभ पाने के लिए करना पड़ता है।

