मंगोलिया से उठे ‘धूल के दैत्य’ ने चीन के हार्बिन को निगला, 130 किमी/घंटा की रफ्तार से चली हवाएं, वीडियो वायरल 

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चीन के उत्तर-पूर्वी महानगर हार्बिन में उस समय अफरा-तफरी मच गई जब मंगोलिया और गोबी मरुस्थल से उठी विशाल धूलभरी आंधी ने पूरे शहर को अपनी चपेट में ले लिया। कुछ ही मिनटों में चमकता हुआ आसमान पीले-नारंगी रंग में बदल गया और लाखों की आबादी वाला शहर धूल के ऐसे समुद्र में खो गया मानो किसी रेगिस्तान ने उसे निगल लिया हो।

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प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार पहले दूर क्षितिज पर धूल की एक विशाल दीवार दिखाई दी। देखते ही देखते वह गुबार तेजी से शहर की ओर बढ़ा और फिर पूरे इलाके पर छा गया। कई लोगों ने बताया कि ऐसा लग रहा था जैसे कोई विशाल धूल का पहाड़ उनकी ओर दौड़ रहा हो। कुछ ही क्षणों में दिन का उजाला गायब हो गया और सड़कों पर रात जैसा धुंधलका फैल गया।

करीब 100 से 130 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से चली हवाओं ने हालात को और भयावह बना दिया। ऊंची-ऊंची इमारतें धूल के पर्दे के पीछे गायब हो गईं। कई इलाकों में दृश्यता घटकर कुछ मीटर तक रह गई। सड़क पर चल रहे वाहन अचानक रुकने को मजबूर हो गए क्योंकि ड्राइवरों को सामने कुछ दिखाई ही नहीं दे रहा था।

सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में देखा गया कि धूल का घना गुबार पूरे शहर को इस तरह ढक रहा था जैसे किसी फिल्म का प्रलयकारी दृश्य हो। लोगों ने अपने चेहरे कपड़ों और मास्क से ढक लिए, दुकानों के शटर गिरने लगे और कई लोग सुरक्षित स्थानों की ओर भागते दिखाई दिए। बच्चों और बुजुर्गों को घरों के भीतर रहने की सलाह दी गई।

मौसम विशेषज्ञों के अनुसार यह धूलभरा तूफान दक्षिणी मंगोलिया और गोबी मरुस्थल के शुष्क क्षेत्रों से उठा था। वहां लंबे समय से सूखी जमीन, तेज हवाएं और कम नमी की स्थिति बनी हुई थी। जैसे ही शक्तिशाली मंगोलियाई चक्रवात सक्रिय हुआ, उसने रेगिस्तानी धूल को हजारों फीट ऊपर उठा दिया। बाद में यही धूल सैकड़ों किलोमीटर की यात्रा कर चीन के कई हिस्सों के साथ हार्बिन तक पहुंच गई।

विशेषज्ञ बताते हैं कि गोबी मरुस्थल दुनिया के सबसे बड़े शुष्क क्षेत्रों में से एक है और यहां से उठने वाली धूल अक्सर चीन, कोरिया और जापान तक पहुंच जाती है। हाल के वर्षों में बढ़ते सूखे, भूमि क्षरण और जलवायु परिवर्तन के कारण ऐसे तूफानों की तीव्रता बढ़ती दिखाई दे रही है।

इस तूफान का असर केवल आसमान के रंग बदलने तक सीमित नहीं रहा। हवा में धूल के सूक्ष्म कणों की मात्रा खतरनाक स्तर तक पहुंच गई, जिससे सांस संबंधी समस्याओं का खतरा बढ़ गया। कई क्षेत्रों में लोगों को घरों के दरवाजे-खिड़कियां बंद रखने और अनावश्यक रूप से बाहर न निकलने की चेतावनी दी गई।

हार्बिन के लोगों के लिए यह अनुभव किसी प्राकृतिक आपदा से कम नहीं था। कुछ मिनट पहले तक सामान्य दिख रहा शहर अचानक धूल की एक विशाल चादर में गायब हो गया। दूर-दूर तक केवल पीला धुंधलका, तेज गर्जन करती हवाएं और उड़ती हुई धूल दिखाई दे रही थी। कई स्थानीय लोगों ने कहा कि उन्होंने अपने जीवन में पहली बार प्रकृति का इतना भयावह रूप देखा।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि गोबी क्षेत्र में सूखे और मरुस्थलीकरण की गति इसी तरह बढ़ती रही, तो भविष्य में एशिया के बड़े शहरों को ऐसे और भी शक्तिशाली धूल तूफानों का सामना करना पड़ सकता है।