तालाब के गहरे गड्ढों ने निगल ली तीन जिंदगियां: मां की चेतावनी भी नहीं रोक सकी मौत, साथ खेले तीन दोस्त एक साथ उठे अंतिम सफर पर

Spread the love

हमीरपुर। मौदहा कोतवाली क्षेत्र के खंडेह गांव में सोमवार को हुआ दर्दनाक हादसा पूरे इलाके को गहरे शोक में डुबो गया। कक्षा छह में पढ़ने वाले तीन जिगरी दोस्त प्रबल यादव (11), आदित्य (8) और सुमित उर्फ भोला (10) तालाब में डूब गए। जो बच्चे सुबह तक गांव की गलियों में हंसी-ठिठोली करते दिखाई दे रहे थे, शाम होते-होते उनकी मौत की खबर ने पूरे गांव को सन्न कर दिया।

ग्रामीण बताते हैं कि तीनों दोस्त साये की तरह साथ रहते थे। स्कूल जाना हो, खेलना हो या गांव में घूमना, हर जगह उनकी दोस्ती मिसाल मानी जाती थी। लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। खेल-खेल में तालाब पहुंचे ये मासूम गहरे पानी और खनन से बने गड्ढों के शिकार हो गए।

मां ने रोका था, लेकिन लौटकर नहीं आया बेटा

आदित्य घर से निकलते समय अपनी मां पूजा से मंदिर के पास खेलने जाने की बात कहकर गया था। मां ने उसे जल्दी लौटने और तालाब में नहाने से मना किया था। लेकिन कुछ ही घंटों बाद उसी तालाब से बेटे के डूबने की खबर पहुंची तो परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। मां की चेतावनी और ममता की पुकार मौत के आगे बेबस साबित हुई।

प्रबल यादव पढ़ाई में तेज था और बड़ा होकर पुलिस विभाग में दरोगा बनने का सपना देखता था। किसान परिवार से ताल्लुक रखने वाले प्रबल की मेहनत और लगन की चर्चा अक्सर गांव में होती थी। उसके असमय निधन ने माता-पिता के साथ पूरे गांव को झकझोर दिया है।

सुमित उर्फ भोला अपने माता-पिता के मजदूरी के लिए बाहर रहने के कारण गांव में दादी यशोदा के साथ रहता था। आर्थिक रूप से कमजोर परिवार का यह मासूम दादी के साथ खेत की सब्जियां बाजार में बेचने में भी हाथ बंटाता था। जिस सोमवार बाजार में वह अक्सर सब्जियां बेचता दिखाई देता था, उसी बाजार के पास स्थित तालाब उसकी जिंदगी का आखिरी पड़ाव बन गया।

पोस्टमार्टम के बाद तीनों दोस्तों के शव एक ही वाहन से गांव पहुंचे तो माहौल बेहद भावुक हो गया। परिजनों की चीख-पुकार और ग्रामीणों की नम आंखों ने हर किसी को विचलित कर दिया। अंतिम यात्रा में पूरा गांव उमड़ पड़ा। लोगों का कहना था कि दोस्ती ऐसी थी कि मौत भी उन्हें अलग नहीं कर सकी।

ग्रामीणों का आरोप है कि ग्राम पंचायत के कलार तालाब में मिट्टी खनन के कारण कई गहरे गड्ढे बन गए हैं, लेकिन वहां न तो चेतावनी बोर्ड लगाए गए और न ही कोई सुरक्षा व्यवस्था की गई। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते सुरक्षा उपाय किए गए होते तो तीन मासूमों की जान बच सकती थी।

परिजनों को मिलेगी आर्थिक सहायता

प्रशासन ने हादसे पर गहरा दुख जताते हुए मृतक बच्चों के परिजनों को चार-चार लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है। साथ ही तालाब की स्थिति और सुरक्षा व्यवस्थाओं की जांच कराने की बात भी कही है।

खंडेह गांव की यह त्रासदी केवल तीन परिवारों का दर्द नहीं, बल्कि उन लापरवाहियों पर बड़ा सवाल है जो हर वर्ष ऐसे हादसों को जन्म देती हैं। तीन मासूम चले गए, लेकिन पीछे छोड़ गए एक ऐसा दर्द, जिसे गांव शायद कभी भूल नहीं पाएगा।