नेपाल संकट: सेना के एक्शन के बाद हालात सुधरने लगे, जेन-जेड ने चुनी अंतरिम नेता

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काठमांडू। नेपाल में युवाओं की अगुवाई वाले Gen-Z आंदोलन की हिंसा के बाद सेना ने मंगलवार रात से कानून-व्यवस्था की कमान संभाल ली है। इसके बाद बुधवार को स्थिति में धीरे-धीरे सुधार देखने को मिला। हालांकि हिंसा प्रभावित तीन जिलों में कर्फ्यू को आगे बढ़ा दिया गया है।

मंगलवार को संसद, राष्ट्रपति भवन, प्रधानमंत्री आवास समेत कई सरकारी दफ्तरों व नेताओं के घरों में आगजनी और तोड़फोड़ के बाद सेना को सड़कों पर उतारा गया। बुधवार को सैनिकों की गश्त बढ़ी, जिससे काठमांडू समेत कई इलाकों में शांति रही। सेना ने चेतावनी दी है कि कर्फ्यू और प्रतिबंधों के दौरान किसी भी तरह का विरोध-प्रदर्शन या हिंसा को आपराधिक कृत्य माना जाएगा।

स्थिति सामान्य होने पर Gen-Z समूह ने अंतरिम सरकार के नेतृत्व के लिए पूर्व प्रधान न्यायाधीश सुशीला कार्की को चुना। उनके अलावा काठमांडू के मेयर बालेंद्र शाह और बिजली बोर्ड के पूर्व सीईओ कुलमन घीसिंग के नाम भी चर्चा में थे। कार्की नेपाल की पहली और एकमात्र महिला प्रधान न्यायाधीश रह चुकी हैं। नेपाली कांग्रेस ने आंदोलनकारियों के साथ सहयोग का संकेत दिया है, हालांकि उसने संवैधानिक प्रक्रिया के पालन पर जोर दिया।

त्रिभुवन अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे (काठमांडू) से बुधवार शाम से उड़ानें दोबारा शुरू कर दी गईं। मंगलवार को हालात बिगड़ने पर सभी घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानें रोक दी गई थीं। भारत सरकार ने एयर इंडिया का विशेष विमान भेजकर वहां फंसे भारतीयों को वापस लाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, दो दिनों की हिंसा में 30 लोगों की मौत हुई है जबकि 1,061 लोग घायल हुए। इनमें से 274 अभी भी अस्पताल में भर्ती हैं।

वहीं, विभिन्न जेलों में कैदियों ने अराजकता का फायदा उठाया और देशभर से 7,000 से अधिक कैदी फरार हो गए। काठमांडू समेत कई इलाकों में लूटपाट और आगजनी के आरोप में 27 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। भारत-नेपाल सीमा पर 3,000 से अधिक ट्रक फंसे हैं, जिससे दोनों देशों के बीच आपूर्ति प्रभावित हुई है। सेना ने नागरिकों से अपील की है कि शांति बनाए रखें और आंदोलन के दौरान लूटी गई हथियार-गोलियां तत्काल सुरक्षा एजेंसियों को सौंप दें।