कृत्रिम आपदा की भेंट चढ़ रहे ग्रामीणों के मकान, डबल इंजन सरकार में भी जनता त्रस्त

Spread the love

हल्द्वानी। शासन एवं प्रशासन की अनदेखी कुमाऊं के ग्रामीण क्षेत्रों के निवासियों पर भारी पड़ रही। पहाड़ी जनपदों में यह स्थिति और अधिक चिंतनीय हो गई। पहाड़ी राज्य के नाम पर बना उत्तराखंड धीरे-धीरे विनाश की ओर बढ़ रहा है। डबल इंजन सरकार के विधायक और सांसद केवल सरकार की योजनाओं को जनता तक पहुंचाने तक की सीमित रह गए हैं। पहाड़ी क्षेत्र के ग्रामीणों का दर्द जनप्रतिनिधियों के लिए केवल औपचारिक समस्या रह गया है। अवैध खनन और विकास के नाम पर हो रहे पेड़ों के कटान से पहाड़ कमजोर हो गए हैं। इसका खामियाजा ग्रामीणों को भुगतना ना पड़ रहा है।

जनपद के कांडा तहसील के तल्ला धपोली निवासी कृपाल धपोला के मकान में दरारें पड़ गई हैं। दिल्ली में नौकरी कर रहे कृपाल धपोला के घर में बीवी और दो बच्चे रहते हैं। बारिश और अतिवृष्टि के चलते जमीन धसने से उनके घर में दरारें पड़ गई हैं। इसके चलते मकान आपदा की जद में आ गया है। भूस्खलन से मकान एक तरफ झुक गया है। प्रशासन से गुहार लगाने के बावजूद अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हो पाई है।  

क्षेत्र पंचायत सदस्य निर्मल शाह ने मौके पर जाकर स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने प्रशासन से पीड़ित परिवार के सुरक्षित स्थान पर पुनर्वास की मांग की। उन्होंने क्षेत्रीय विधायक सुरेश गड़िया को भी समस्या से अवगत कराया है।

गौरतलब है कि जनपद बागेश्वर में खड़िया खनन के चलते कई मकानों में दरारें पड़ गई हैं। न्यायालय के आदेश के बाद खड़िया खनन पर रोक लगाई गई है। अवैध रूप से हो रहे खड़िया खनन से न केवल आवासीय मकान को नुकसान पहुंचा है, बल्कि प्रकृति के साथ भी खिलवाड़ किया गया है। सरकार के राजस्व पूर्ति के लिए ग्रामीणों के बेघर होने की स्थिति उत्पन्न हो गई है