राजनीति से कलंग बना “उत्तराखंड पंचायत चुनाव”, राज्य आंदोलनकारियों की कलम से

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नैनीताल जिला पंचायत अध्यक्ष निर्वाचन 2025 में पांच सदस्यों के अपहरण कांड की वास्तविकता आखिर क्या है? जनता को बेवकूफ तो नहीं बना रहे हैं “भाजपा और कांग्रेस” के जिम्मेदार नेता? नैनीताल अपहरण कांड की CBI जांच कराई जाए तो वास्तविकता उजागर हो जाएगी।

नैनीताल। 14 अगस्त को नैनीताल जिला पंचायत अध्यक्ष निर्वाचन 2025 के समय हाईप्रोफाइल अपहरण कांड का दिनदहाड़े ड्रामा हुआ। राजनीतिक सूत्रों के अनुसार जिला पंचायत अध्यक्ष निर्वाचन के लिए सदस्य ही वोटिंग करते हैं। आम जनता को वोटिंग करने का अधिकार नहीं है। जिले में जितने भी विकास कार्य होते हैं, उसके करोड़ों रुपए के सरकारी बजट की अंतिम स्वीकृति जिला पंचायत अध्यक्ष के द्वारा ही दी जाती है। जिला पंचायत अध्यक्ष को ही राज्य मंत्री की सुविधायें भी प्राप्त हैं। इसीलिए कांग्रेस और भाजपा के धनबल से प्रभावशाली लोग “जिला पंचायत अध्यक्ष बनने के लिए करोड़ों रुपया पानी की तरह बहा देते हैं”।

जिला पंचायत के पूर्व सदस्य ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि “जिला पंचायत निर्वाचन में एक सदस्य की कीमत आज से 10 साल पहले करीब 20 लाख रुपए थी”। जो प्रतिनिधि जिला पंचायत सदस्य की कीमत अधिक लगता है। उसे ही जिला पंचायत अध्यक्ष बनने का सौभाग्य प्राप्त होता रहा है। वर्तमान समय में राजनीतिक पार्टी से जुड़े लोग प्रॉपर्टी डीलिंग के धंधे से करोड रुपए की आय अर्जित कर चुके हैं। पैसे से प्रभावशाली लोग ही वर्तमान समय में जनप्रतिनिधि निर्वाचित होने का सौभाग्य प्राप्त करते हैं। 

जांच का प्रश्न यह है कि…

1. नैनीताल जिले के पांच जिला पंचायत सदस्यों का 14 अगस्त 2025 को दिनदहाड़े नैनीताल से अपहरण होता है तो… ऐसी स्थिति नैनीताल जनपद के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी क्या कर रहे थे? जबकि नैनीताल से बाहर भगाने के लिए 03 सड़के ही हैं। ऐसी स्थिति नैनीताल अपहरण कांड में अधिकारियों के भी सम्मिलित होने की संभावना है। क्योंकि बिना पुलिस और प्रशासन सहमति के बगैर इतना बड़ा कांड नैनीताल में नहीं हो सकता है।

2. दूसरा जांच का प्रश्न यह है कि जिन जिला पंचायत सदस्यों के अपहरण होने के आरोप लगे हुए हैं , उन लोगों द्वारा पुलिस प्रशासन को शपथ पत्र उपलब्ध कराने की कार्रवाई आखिर किसके दबाव में की? या कोई अन्य सौदेबाजी हो गई थी? जबकि उनके परिजनों द्वारा न्यायालय में उपस्थित होकर अपहरण होने के सूचना दी गई है।

3. नैनीताल के भारतीय जनता पार्टी के जिलाध्यक्ष प्रताप सिंह बिष्ट तथा राज्य मंत्री शंकर कोरंगा इत्यादि पर अपहरण करने का आरोप लगाया गया।  एक जिला पंचायत सदस्य प्रमोद कोटलिया के भाई के द्वारा माननीय हाईकोर्ट की डबल बेंच को इन लोगों के द्वारा ही जिला पंचायत सदस्यों के अपहरण करने करने सूचना हाई कोर्ट में उपस्थित होकर दी गई। तो नैनीताल जनपद पुलिस द्वारा भारतीय जनता पार्टी के जिला अध्यक्ष जनपद नैनीताल प्रताप बिष्ट और दर्जा मंत्री शंकर कोरंगा व अन्य को गिरफ्तार क्यों नहीं कर रही है। यह भी काफी गंभीर मामला है और जांच का प्रश्न है।

4. नैनीताल जिला पंचायत सदस्य एवं अध्यक्ष पद की प्रत्याशी दीपा दर्मवाल के द्वारा नेता प्रतिपक्ष/ विधायक यशपाल आर्य और हल्द्वानी विधायक सुमित हृदेश तथा कुछ अन्य के विरुद्ध तल्लीताल पुलिस थाने में लिखित तहरीर देकर चुनाव में मारपीट करने और जिला पंचायत सदस्यों को गायब करने के प्रयास का आरोप लगाया है। अगर यह घटना सत्य है तो इस मामले में मुकदमा दर्ज क्यों नहीं हो रहा है? और अगर घटना असत्य है, तो झूठी सूचना देने वाली महिला जिला पंचायत सदस्य पर नैनीताल जनपद पुलिस कार्रवाई क्यों नहीं कर रही है यह जांच का गंभीर प्रश्न है।

5. जांच का महत्वपूर्ण प्रश्न यह भी है कि नैनीताल जिला पंचायत कार्यालय के आसपास BNSS की धारा 163 लगी हुई थी तो ऐसी स्थिति में कांग्रेस पार्टी और भाजपा के नेताओं के विरुद्ध धारा 163 का उल्लंघन करने के मामले में मुकदमा दर्ज आखिर क्यों नहीं हुआ है।

6. नैनीताल जिला मुख्यालय में मुख्यमंत्री के सचिव और कुमाऊं कमिश्नर नैनीताल दीपक रावत (आईएएस) द्वारा आखिर नैनीताल जिला पंचायत अध्यक्ष के निर्वाचन को अपने पर्यवेक्षण में क्यों नहीं करवाया गया ? और अचानक कहां गायब हो गए।

“यह भी जांच का महत्वपूर्ण प्रश्न है”।

जबकि जिला पंचायत अध्यक्ष को राज्य सरकार द्वारा राज्य मंत्री की सुविधा दी गई है और ऐसी स्थिति में नैनीताल जिला पंचायत अध्यक्ष के निर्वाचन के समय कुमाऊं कमिश्नर नैनीताल सचिव मुख्यमंत्री का अचानक नदारत रहना आखिर क्या दर्शाता है?? यह भी जांच का प्रश्न है।

7. जिलाधिकारी नैनीताल द्वारा जिला पंचायत अध्यक्ष नैनीताल के निर्वाचन में गड़बड़ी की आशंका की जानकारी पहले ही नैनीताल जिले के पुलिस अधिकारियों को दे दी गई थी? तो ऐसी स्थिति में भी जनपद नैनीताल के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी आखिर क्या कर रहे थे।
“यह भी जांच का महत्वपूर्ण प्रश्न है”

8. कुल मिलाकर यह प्रश्न है कि अगर नैनीताल में जिला पंचायत सदस्यों का दिनदहाड़े अपहरण हुआ है? इस अपहरण कांड के मामले में अभी तक नैनीताल जिले के भाजपा जिलाध्यक्ष प्रताप बिष्ट एवं दर्जामंत्री शंकर कोरंगा अन्य का नाम उत्तराखंड हाईकोर्ट की सुनवाई के समय आ जाने पर भी उत्तराखंड हाईकोर्ट के आदेश में स्पष्ट रूप से आ जाने के बाद भी अभी तक नैनीताल जनपद पुलिस द्वारा कोई भी कार्रवाई नहीं करना भी काफी गंभीर मामला है।

अगर 14 अगस्त 2025 को नैनीताल में जिला पंचायत अध्यक्ष के निर्वाचन के दौरान कांग्रेस पार्टी और भाजपा के नेताओं द्वारा किया गया ड्रामा एक नौटंकी है? तो इस मामले में दोनों पार्टियों के नेताओं के विरुद्ध करवाई किया जाना आवश्यक है, ताकि भविष्य में कोई भी राजनीतिक पार्टी पुलिस प्रशासन /जिला प्रशासन/और आम जनता को गुमराह करने का कृत्य नहीं कर सके ।

नाम नहीं छापने की शर्त पर कुछ सेवानिवृत्त पुलिस अधिकारियों/ आम जनता तथा जनप्रतिनिधियों ने कहा कि यह सारी घटना में पुलिस और प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारीयों तथा दोनों राजनीतिक पार्टी के नेताओं की पूर्ण मिलीभगत से ही हुई है–तभी इसी तरह की अराजकता 14 अगस्त को नैनीताल जिला मुख्यालय दिन दहाड़े सरेआम देखने को मिली। कुल मिलाकर उस दिन नैनीताल जिला पंचायत अध्यक्ष के निर्वाचन में तलवारों/ हथियारों से लैस लोगों द्वारा निर्वाचित सदस्यों को जबरन गाड़ी के अंदर डालना और बेतालघाट ब्लॉक प्रमुख चुनाव में फायरिंग की घटना यह प्रदर्शित करती है कि नैनीताल जिले में कानून व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गई है।

14 अगस्त 2025 तो नैनीताल जिले में हुई घटना का उत्तरदायित्व जिले के सर्वोच्च पद में बैठे वरिष्ठ पुलिस अधिकारीयों और प्रशासनिक अधिकारी है । सर्वप्रथम उनके विरुद्ध ही कार्रवाई होना आवश्यक है।

जनता में चर्चा है कि इस मामले की गाज बड़े पुलिस अधिकारियों और प्रशासनिक अधिकारियों पर नहीं गिरेगी? और छोटे अधिकारियों और कर्मचारियों को लाइन हाजिर करके और निलंबित करके इस सारे मामले को दबा दिया जाएगा, लेकिन मामला उत्तराखंड हाईकोर्ट में दर्ज हो चुका है ऐसी स्थिति में उत्तराखंड की जनता की नजर न्यायपालिका पर लगी हुई है आखिर न्यायपालिका क्या निर्णय सुनाती है

इधर कांग्रेस पार्टी और भाजपा के नेताओं द्वारा भी 14 अगस्त 2025 को नैनीताल जनपद में हुई अराजकता पर राजनीतिक लाभ लेने और जनता को गुमराह करने की रणनीति बनना प्रारंभ कर दिया है।उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारीयों जिनके द्वारा राज्य आंदोलन में अहम भूमिका निभाकर उत्तराखंड राज्य बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई उन लोगों को प्रदेश की सरकार द्वारा सरकारी गेस्ट हाउस में निशुल्क सुविधा भी नहीं दी जा रही हैं। उत्तराखंड राज्य की जनता को सभी राजनीतिक पार्टी के नेताओं द्वारा गुमराह किया जा रहा है। उत्तराखंड की जनता जहां बेरोजगारी और अन्य समस्याओं से जूझ रही है वहीं उत्तराखंड के राजनीतिक पार्टी के नेता उत्तराखंड में अराजकता और मनमानी कर रहे हैं।

क्या उत्तराखंड राज्य का गठन …

राज्य आंदोलनकारीयो और आम जनता द्वारा उत्तराखंड में चल रही अराजकता/ मनमानी/और नौकरशाही तथा भ्रष्टाचारियों को संरक्षण देने के लिए ही किया गया था।

सौजन्य से
(उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी संगठन जनपद नैनीताल की कलम से)