हल्द्वानी। कैंची धाम में बढ़ती श्रद्धालुओं की संख्या के बीच पंजीकरण व्यवस्था लागू करने की तैयारी है। मकसद है कि मंदिर पहुंचने वाले श्रद्धालुओं की संख्या पर नजर रखी जा सके, हल्द्वानी-अल्मोड़ा मार्ग पर यातायात का दबाव घटे और दर्शन के दौरान अव्यवस्था की स्थिति न बने। लेकिन इस प्रस्ताव के साथ एक बड़ा सवाल भी जुड़ा है, जब केदारनाथ और बदरीनाथ समेत चारधाम यात्रा में पहले से पंजीकरण की व्यवस्था है, तो फिर भारी भीड़ और जाम की समस्या सामने क्यों आती रही है?
नैनीताल जिला प्रशासन ने कैंची धाम में पंजीकरण लागू करने का प्रस्ताव पर्यटन विभाग को भेजा है। प्रस्ताव के अनुसार, प्रतिदिन 20 से 25 हजार श्रद्धालुओं को दर्शन की अनुमति देने पर विचार किया जा रहा है। श्रद्धालुओं से ठहरने और पार्किंग की जानकारी भी लेने की योजना है। निर्धारित संख्या पूरी होने पर पोर्टल पर आगे की तारीख चुनने का विकल्प देने का प्रस्ताव है। हालांकि, शासन की स्वीकृति मिलने तक इसे लागू व्यवस्था नहीं माना जा सकता।
चारधाम में पंजीकरण, फिर भी क्यों बनी चुनौती?
चारधाम यात्रा में पंजीकरण के साथ वाहन संबंधी विवरण, धाम पहुंचने पर सत्यापन और दर्शन के लिए स्लॉट टोकन जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं। सरकार ने इन व्यवस्थाओं को यात्रा की निगरानी, सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन में सहायक बनाने का लक्ष्य रखा है। इसके बावजूद मई 2024 में श्रद्धालुओं की भारी आमद और मार्गों पर वाहनों की लंबी कतारों के बीच ऑफलाइन पंजीकरण रोकने का निर्णय लिया गया था। यह स्थिति बताती है कि पंजीकरण अपने आप में भीड़ नियंत्रण की गारंटी नहीं है।
कैंची धाम में असली परीक्षा कहां होगी?
कैंची धाम की चुनौती केवल मंदिर में प्रवेश करने वाले श्रद्धालुओं की संख्या तक सीमित नहीं है। हल्द्वानी से पहाड़ की ओर जाने वाले वाहनों का दबाव, पार्किंग की उपलब्धता, सड़क पर यातायात का संचालन और स्थानीय लोगों की आवाजाही भी इससे जुड़ी है। ऐसे में यदि पोर्टल पर पंजीकरण की संख्या सीमित कर दी जाए, लेकिन सड़क पर वाहनों को व्यवस्थित करने और पार्किंग की पर्याप्त व्यवस्था न हो, तो जाम की समस्या फिर भी बनी रह सकती है।
प्रस्ताव में हल्द्वानी की सीमा पर पंजीकरण जांचने के लिए बैरियर लगाने और जरूरत पड़ने पर वाहनों को पार्क कराकर शटल सेवा से आगे भेजने की योजना भी शामिल है। इस व्यवस्था की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि बैरियर पर जांच कितनी तेजी से होती है, पार्किंग में कितने वाहन समा सकते हैं और शटल सेवा कितनी नियमित रहती है।
स्थानीय लोगों, पर्वतीय यात्रियों के लिए भी अहम
कैंची धाम में श्रद्धालुओं की संख्या सीमित करने की प्रस्तावित व्यवस्था का असर केवल मंदिर आने वाले लोगों पर नहीं, बल्कि रोजाना पहाड़ी क्षेत्रों में आने-जाने वालों पर भी पड़ सकता है। प्रस्ताव में स्थानीय निवासियों को पहचान पत्र के आधार पर प्रवेश देने की बात सामने आई है। लेकिन स्थानीय पहचान की जांच, आपातकालीन आवाजाही और नियमित यात्रियों के लिए अलग व्यवस्था कैसे चलेगी, इसे स्पष्ट करना जरूरी होगा।
पंजीकरण के साथ जवाबदेही भी जरूरी
कैंची धाम के लिए पंजीकरण लागू होने से पहले प्रशासन के सामने एक अवसर है कि वह चारधाम यात्रा के अनुभव से सीख लेकर व्यवस्था तैयार करे। रोजाना की निर्धारित सीमा के साथ वास्तविक प्रवेश संख्या, पार्किंग की स्थिति, यातायात में लगने वाला समय और दर्शन की प्रतीक्षा अवधि की नियमित निगरानी की जाए। व्यवस्था लागू होने के बाद इन आंकड़ों की समीक्षा से ही पता चल सकेगा कि पंजीकरण ने वास्तव में कितनी राहत दी।
सवाल सिर्फ यह नहीं कि कैंची धाम में कितने श्रद्धालुओं का पंजीकरण होगा, बल्कि यह है कि पंजीकरण के बाद सड़क, पार्किंग और दर्शन की व्यवस्था कितनी बेहतर होगी। यदि इन पहलुओं पर एक साथ काम किया गया, तभी ऑनलाइन पंजीकरण श्रद्धालुओं के लिए सुविधा और स्थानीय लोगों के लिए राहत का माध्यम बन सकेगा।



