
उत्तराखंड में अगले वर्ष होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज होने लगी हैं। चुनावी तैयारियों के बीच सामने आ रहे अलग-अलग जनमत सर्वे ने प्रदेश के राजनीतिक माहौल को और गरमा दिया है। हालिया न्यूज लीडर-मैट्रिज सर्वे में भाजपा को 70 सदस्यीय विधानसभा में 47 सीट मिलने का अनुमान जताया गया है। सर्वे के मुताबिक कांग्रेस को 22 और बसपा को एक सीट मिल सकती है। हालांकि जनमत सर्वे चुनाव परिणाम नहीं होते और वास्तविक नतीजे मतदान के बाद ही सामने आएंगे।
इससे पहले अगस्त में इंडिया टुडे-सीवोटर के सर्वे में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को मुख्यमंत्री पद के लिए 28.2 प्रतिशत लोगों की पसंद बताया गया था। इसी अवधि में सामने आए टाइम्स नाउ भारत के सर्वे में भाजपा को 54 और कांग्रेस को 14 सीट मिलने का अनुमान लगाया गया था। अलग-अलग सर्वे में आंकड़ों का अंतर भी यह बताता है कि चुनाव से पहले राजनीतिक तस्वीर को लेकर अभी कई समीकरण बनना बाकी हैं।
उत्तराखंड की राजनीति में 2027 का चुनाव मुख्यमंत्री के नेतृत्व, सरकार के कामकाज, स्थानीय मुद्दों और विपक्ष की रणनीति के इर्द-गिर्द भी घूमता नजर आ रहा है। भाजपा सरकार अपने कार्यकाल के फैसलों और विकास कार्यों को जनता के बीच लेकर जाने की तैयारी में है। इनमें समान नागरिक संहिता, नकल विरोधी कानून, महिलाओं को सरकारी नौकरियों में क्षैतिज आरक्षण, भू-कानून से जुड़े फैसले और राज्य की सांस्कृतिक पहचान से जुड़े मुद्दे प्रमुख हैं।
सरकार की ओर से चारधाम और मानसखंड क्षेत्र में धार्मिक पर्यटन सुविधाओं के विस्तार, सड़क और संपर्क व्यवस्था में सुधार तथा पर्यटन आधारित स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के प्रयासों को भी उपलब्धियों के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है। दूसरी ओर विपक्ष सरकार के कामकाज और विभिन्न जन मुद्दों को लेकर अपनी रणनीति तैयार कर रहा है।
विधानसभा चुनाव में प्रदेश की सभी 70 सीटों पर मुकाबला होगा और बहुमत के लिए 36 विधायकों का समर्थन जरूरी है। पिछले दो विधानसभा चुनावों में भाजपा ने बहुमत हासिल किया था। ऐसे में आगामी चुनाव में सत्ता पक्ष के सामने अपने प्रदर्शन को दोहराने की चुनौती होगी, जबकि विपक्ष के सामने सरकार के खिलाफ मुद्दों को प्रभावी ढंग से जनता तक पहुंचाने की चुनौती रहेगी।
फिलहाल सामने आए सर्वे ने चुनाव से पहले राजनीतिक चर्चाओं को जरूर तेज कर दिया है। लेकिन उत्तराखंड के पहाड़ी और मैदानी क्षेत्रों के अलग-अलग स्थानीय मुद्दे, प्रत्याशियों का चयन, दलों के बीच गठजोड़ और चुनाव के दौरान बनने वाला माहौल आने वाले महीनों में तस्वीर को प्रभावित कर सकता है।




