
कश्मीर घाटी में प्रधानमंत्री पुनर्वास पैकेज के तहत काम कर रहे कश्मीरी पंडित कर्मचारियों को करीब डेढ़ दशक बाद एक बार फिर धमकियों का सामना करना पड़ रहा है। सरकारी नौकरी छोड़ने की चेतावनी और कर्मचारियों की निजी जानकारी सार्वजनिक किए जाने की घटनाओं से उनमें भय बढ़ गया है। कर्मचारियों ने गृहमंत्री अमित शाह को पत्र भेजकर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने और धमकियों की गंभीरता से जांच कराने की मांग की है।
कर्मचारियों का कहना है कि वे पिछले 15 वर्षों से घाटी में अपना जीवन दोबारा बसाने की कोशिश कर रहे हैं। अब सामने आ रही धमकियां उन्हें 1990 के दशक के उस दौर की याद दिला रही हैं, जब बड़ी संख्या में कश्मीरी पंडितों को घाटी छोड़नी पड़ी थी। उनका कहना है कि वे कश्मीर छोड़ना नहीं चाहते, लेकिन परिवार की सुरक्षा को लेकर लगातार चिंता बढ़ रही है।
ऑल पीएम पैकेज एम्प्लॉईज फोरम के अध्यक्ष सनी रैना ने गृहमंत्री को भेजे पत्र में कर्मचारियों और उनके परिवारों की सुरक्षा का मुद्दा उठाया है। पत्र के मुताबिक हाल के सप्ताहों में कुछ कर्मचारियों को धमकी भरे पत्र मिले हैं। इनमें सरकारी नौकरी छोड़ने की चेतावनी दिए जाने की बात कही गई है। कुछ कर्मचारियों के फोन नंबर, घर के पते और वाहनों के पंजीकरण से जुड़ी जानकारी भी इंटरनेट पर प्रसारित होने की बात सामने आई है।
कर्मचारियों ने प्रधानमंत्री पैकेज के तहत कार्यरत लोगों, उनके परिवारों और आवासीय कॉलोनियों की सुरक्षा बढ़ाने की मांग की है। साथ ही सभी आवासीय परिसरों की सुरक्षा समीक्षा कराने और धमकी मिलने की स्थिति में तत्काल शिकायत व सुरक्षा उपलब्ध कराने की व्यवस्था बनाने की अपील की है।
कर्मचारियों ने कहा है कि उन्हें नौकरी और सुरक्षा में से किसी एक को चुनने के लिए मजबूर नहीं किया जाना चाहिए। वे घाटी में रहकर काम करना चाहते हैं, लेकिन इसके लिए सुरक्षित माहौल जरूरी है। वर्ष 2022 में राहुल भट की हत्या के बाद भी घाटी में कार्यरत कश्मीरी पंडित कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठे थे। अब नई धमकियों ने इस चिंता को फिर गहरा कर दिया है।




