10 रुपये के स्टांप पर बेच दी वन विभाग की जमीन, अब 83 निर्माणों पर चला बुलडोजर, पूछड़ी में दूसरे चरण की बड़ी कार्रवाई

Spread the love

रामनगर। वन विभाग की जमीन पर पहले कब्जा किया गया, फिर उसे अपनी बताकर 10 रुपये के स्टांप पेपर पर दूसरे लोगों को बेच दिया गया। किसी ने दो लाख तो किसी ने तीन लाख रुपये देकर जमीन खरीदी और वहां मकान बनाकर परिवार के साथ रहने लगा। अब इसी जमीन पर बने मकानों को हटाने के लिए शनिवार सुबह रामनगर के पूछड़ी गांव में प्रशासन का बुलडोजर गरजने लगा। सुबह पांच बजे से वन विभाग, पुलिस और प्रशासन की संयुक्त टीम ने ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू कर दी। दूसरे चरण के इस अभियान में करीब 15 हेक्टेयर वन भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराया जाना है। कार्रवाई के लिए 552 पुलिसकर्मियों और तीन कंपनी पीएसी को तैनात किया गया है।

रामनगर के तराई पश्चिमी वन प्रभाग की रामनगर रेंज के पूछड़ी क्षेत्र में वन विभाग की जमीन पर करीब एक दशक पहले अतिक्रमण और अवैध कॉलोनी बसाने का सिलसिला शुरू हुआ था। धीरे-धीरे यहां बड़ी संख्या में परिवार बस गए। जांच में सामने आया कि वन विभाग की जमीन को कुछ लोगों ने अपनी बताकर स्टांप पेपर के माध्यम से बेचा। आरोप है कि लोगों को 10 रुपये के स्टांप पर जमीन के सौदे किए गए। कई परिवारों ने डेढ़ से तीन लाख रुपये तक देकर जमीन खरीदने की बात कही थी। जांच के दौरान करीब 170 परिवारों के इस क्षेत्र में बसने की जानकारी सामने आई थी।

वन विभाग की जमीन को अपनी बताकर बेचने के मामले में वन विभाग की तहरीर पर पुलिस ने छह लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था। इनमें मोहम्मद ताहिर, अजमत, फईम अहमद, उस्मान खान, कमला देवी और धीरेंद्र के नाम शामिल हैं। आरोप था कि इन्होंने वन विभाग की जमीन को अपनी बताकर अलग-अलग लोगों को बेचा। मामले में धोखाधड़ी और दस्तावेजों की कूटरचना के आरोप लगाए गए। इसके बाद प्रशासनिक स्तर पर भी जांच कराई गई और अवैध कब्जे तथा जमीन की खरीद-बिक्री के पूरे प्रकरण की जांच के लिए विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित करने के निर्देश दिए गए थे। हालांकि, मुकदमे में नामजद होना आरोप सिद्ध होना नहीं है।

पहले चरण में 51 परिवारों के अतिक्रमण हटाए

पूछड़ी में अतिक्रमण हटाने के लिए प्रशासन ने चरणबद्ध कार्ययोजना तैयार की थी। इसके तहत सात दिसंबर 2025 को पहले चरण की कार्रवाई की गई। उस दौरान 15 पक्के मकानों समेत 51 परिवारों के अतिक्रमण हटाए गए। करीब सात घंटे तक चले अभियान में वन विभाग, पुलिस और राजस्व विभाग की संयुक्त टीम ने कार्रवाई की। इस दौरान वन विभाग की जमीन के साथ नगर पालिका के प्रस्तावित ट्रंचिंग ग्राउंड की जमीन से भी कब्जा हटाया गया। नगर पालिका ने वर्ष 2019 में ट्रंचिंग ग्राउंड के लिए वन विभाग से 12 बीघा जमीन 30 साल के लिए ली थी और इसके लिए 98 लाख रुपये का भुगतान किया था। कब्जा नहीं मिलने के कारण इसके एक हिस्से पर भी अतिक्रमण हो गया था।

दूसरे चरण में 83 निर्माणों को हटाने की कार्रवाई

अब दूसरे चरण में वन विभाग ने 92 भवनों को चिह्नित किया था। इनमें नौ मामलों के न्यायालय में विचाराधीन होने के कारण फिलहाल उन्हें कार्रवाई से बाहर रखा गया है। शेष 83 निर्माणों को हटाने के लिए अभियान शुरू किया गया है। करीब 15 हेक्टेयर वन भूमि को कब्जामुक्त कराने का लक्ष्य है। इसके लिए 30 से अधिक जेसीबी और पोकलैंड मशीनों की मदद ली जा रही है। प्रशासन की ओर से कार्रवाई से पहले संबंधित लोगों को जमीन खाली करने के लिए नोटिस दिए जाने की प्रक्रिया भी अपनाई गई थी।

अभियान के दौरान किसी भी तरह के विरोध और अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं। पांच एसपी स्तर के अधिकारियों, छह क्षेत्राधिकारियों, 25 निरीक्षकों और 82 उपनिरीक्षकों समेत 552 पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है। इसके अलावा तीन कंपनी पीएसी भी लगाई गई हैं। पूरे क्षेत्र को दो सुपर जोन, सात जोन और 14 सेक्टर में बांटा गया है। छह बैरियर बनाए गए हैं। पुलिस अधीक्षक डॉ. जगदीश चंद्र को अभियान की जिम्मेदारी सौंपी गई है। वन विभाग की ओर से दो डीएफओ, पांच एसडीओ, 14 रेंजर और 240 डिप्टी रेंजर समेत अन्य कर्मचारी मौके पर तैनात हैं। अग्निशमन दल, बम निरोधक दस्ता, दंगा नियंत्रण टीम, आंसू गैस दस्ता, त्वरित प्रतिक्रिया दल और स्वास्थ्य विभाग की टीम को भी तैयार रखा गया है। सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनजर कार्रवाई स्थल के तीन किलोमीटर के दायरे में आवाजाही पर प्रतिबंध लगाया गया है।