भाजपा-कांग्रेस के बाद सपा ने भी कसी कमर, 2027 के रण में संगठन और गठबंधन दोनों पर नजर

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हल्द्वानी। उत्तराखंड में 2027 के विधानसभा चुनाव की सियासी तैयारी तेज होने के साथ समाजवादी पार्टी ने भी मैदान में सक्रियता बढ़ा दी है। प्रदेश अध्यक्ष की कमान हाजी अब्दुल मतीन सिद्दीकी को सौंपे जाने के बाद पार्टी ने संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने और जनता के बीच पहुंच बढ़ाने की कवायद शुरू कर दी है। रुद्रपुर में प्रदेश अध्यक्ष के स्वागत के बहाने पार्टी ने चुनावी अभियान की दिशा भी साफ कर दी।

रुद्रपुर में आयोजित कार्यक्रम में मतीन सिद्दीकी ने कहा कि सपा जल्द नई प्रदेश कार्यकारिणी का गठन करेगी और संगठन में सक्रिय कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारी दी जाएगी। उनका जोर संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने और युवाओं, किसानों, मजदूरों, महिलाओं समेत विभिन्न वर्गों के मुद्दों को लेकर जनता के बीच जाने पर रहा।

सियासी तौर पर सबसे अहम संकेत गठबंधन को लेकर रहा। प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि 2027 के चुनाव में कांग्रेस के साथ गठबंधन और सीट बंटवारे को लेकर बातचीत की जाएगी। सम्मानजनक सीटें मिलने पर गठबंधन के तहत चुनाव लड़ने की बात कही गई, जबकि सहमति नहीं बनने की स्थिति में सपा ने अपने दम पर चुनाव लड़ने का विकल्प खुला रखा है।

यानी सपा फिलहाल गठबंधन की संभावना और अकेले चुनाव लड़ने की तैयारी, दोनों रास्ते खुले रखकर आगे बढ़ रही है। पार्टी का अगला फोकस नई प्रदेश कार्यकारिणी, बूथ स्तर का संगठन और ऐसे विधानसभा क्षेत्रों की पहचान पर रहने वाला है जहां वह अपना आधार मजबूत करने का दावा कर रही है। हाल में हल्द्वानी में भी प्रदेश अध्यक्ष ने मजबूत जनाधार वाली सीटों पर चुनाव लड़ने और संगठन को बूथ स्तर तक ले जाने की बात कही थी।

रुद्रपुर में हुए शक्ति प्रदर्शन को इसी चुनावी तैयारी की कड़ी के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि सपा के सामने चुनौती अपने संगठन को जमीनी स्तर पर सक्रिय करने और उत्तराखंड की दो प्रमुख राजनीतिक धाराओं के बीच अपनी राजनीतिक जगह स्पष्ट करने की है। 

रुद्रपुर के कार्यक्रम से फिलहाल इतना साफ है कि 2027 के चुनावी मैदान में सपा अपनी मौजूदगी दर्ज कराने की तैयारी में है। अब नई कार्यकारिणी और जमीनी संगठन के जरिए यह तैयारी कितनी आगे बढ़ती है, इस पर नजर रहेगी।