रुद्रपुर। नवरात्र में घरों और मंदिरों में छोटी-छोटी कन्याओं को देवी का स्वरूप मानकर उनका पूजन किया जा रहा है। बेटियों के सम्मान, सुरक्षा और सुख-समृद्धि की कामना के बीच रुद्रपुर की एक घटना ने इसी आस्था के सामने समाज को असहज कर देने वाला सवाल खड़ा कर दिया। जिस मासूम को जन्म के बाद सबसे अधिक देखभाल, सुरक्षा और मां की गोद की जरूरत थी, वह एक सड़क पर खड़ी कार के नीचे लावारिस हालत में मिली। उसकी रोने की आवाज ने राहगीरों का ध्यान खींचा, जिसके बाद उसे अस्पताल पहुंचाया गया। अब सवाल केवल बच्ची को वहां छोड़ने वाले की पहचान का नहीं, बल्कि उस परिस्थिति का भी है जिसमें एक नवजात की सुरक्षा खतरे में पड़ गई।
शनिवार शाम करीब सवा छह बजे इंद्रा कॉलोनी और सिंह कॉलोनी को जोड़ने वाले संपर्क मार्ग पर खड़ी एक कार के नीचे से बच्चे के रोने की आवाज सुनाई दी। आसपास मौजूद लोगों ने जब तलाश की तो वहां नवजात बच्ची दिखाई दी। करीब दो दिन की बताई जा रही मासूम की हालत देखकर लोग घबरा गए। स्थानीय लोगों ने तत्काल आदर्श कॉलोनी चौकी प्रभारी प्रदीप पंत को सूचना दी।
सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और बच्ची को जिला अस्पताल में भर्ती कराया। चिकित्सकों ने उसका उपचार शुरू किया। मामले की गंभीरता को देखते हुए क्षेत्राधिकारी विभव सैनी और बाल संरक्षण से जुड़े प्रतिनिधि भी अस्पताल पहुंचे। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, उपचार के बाद बच्ची की हालत स्थिर बताई गई।
एक आवाज ने बचाई मासूम की जान
इस घटना में आसपास के लोगों की सतर्कता अहम रही। कार के नीचे से आ रही रोने की आवाज पर ध्यान नहीं दिया जाता तो बच्ची को समय पर सहायता मिलने में देरी हो सकती थी। स्थानीय लोगों ने संवेदनशीलता दिखाते हुए पुलिस को सूचना दी और बच्ची को तत्काल चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने में मदद की।
घटना के बाद लोगों में मासूम को इस हालत में छोड़ने को लेकर नाराजगी दिखाई दी। हालांकि, बच्ची को वहां किसने छोड़ा और इसके पीछे क्या परिस्थितियां थीं, इसका पता जांच के बाद ही चल सकेगा। फिलहाल इन सवालों के जवाब सामने आना बाकी हैं।



