बनभूलपुरा रेलवे भूमि अतिक्रमण मामला: 10 दिसंबर को होगी सुप्रीम सुनवाई

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हल्द्वानी। बनभूलपुरा क्षेत्र में रेलवे की भूमि से अतिक्रमण हटाने के मामले में मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई टल गई। अब अगली सुनवाई 10 दिसंबर को निर्धारित की गई है।

रेलवे का कहना है कि हल्द्वानी में उसकी करीब 29 एकड़ भूमि पर 4365 अतिक्रमणकारी कब्जा जमाए हुए हैं। इसी मामले में आज सुनवाई होनी थी, जिसके मद्देनजर हल्द्वानी शहर में अलर्ट जारी किया गया था और बनभूलपुरा को हाईअलर्ट पर रखा गया। बाहरी व्यक्तियों व वाहनों के प्रवेश पर रोक के साथ क्षेत्र में पुलिस, आईटीबीपी और सीआरपीएफ के जवान तैनात किए गए थे।

शाम तक लोगों की निगाहें सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर टिकी रहीं, लेकिन सुनवाई टलने की जानकारी आने के बाद स्थिति यथावत बनी रही।

दो दशक से चल रही कानूनी लड़ाई

  • बनभूलपुरा और आसपास रेलवे भूमि पर हुए अतिक्रमण को हटाने की प्रक्रिया लगभग 19 वर्षों से चल रही है।
  • याचिकाकर्ता रविशंकर जोशी के अनुसार, वर्ष 2007 में हाईकोर्ट ने अतिक्रमण हटाने के आदेश पारित किए थे, जिसके बाद प्रशासन ने 2400 वर्गमीटर भूमि अतिक्रमणमुक्त कराई, लेकिन स्पष्ट सीमा निर्धारण (हदबंदी) न होने से दोबारा अतिक्रमण हो गया।

मुख्य कानूनी घटनाक्रम

  • 2013: गौला नदी में अवैध खनन के मामले की सुनवाई के दौरान रेलवे अतिक्रमण का मुद्दा दोबारा उठा।
  • 9 नवंबर 2016: हाईकोर्ट ने 10 सप्ताह में अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिए।
  • 10 जनवरी 2017: प्रदेश सरकार द्वारा भूमि को नजूल भूमि बताने की दलील कोर्ट ने खारिज की।
  • मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, जहां आदेश दिया गया कि प्रभावित लोग हाईकोर्ट में अपनी दलील रखें।
  • 6 मार्च 2017: रेलवे को बेदखली अधिनियम 1971 के तहत कार्रवाई करने के निर्देश, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई।
  • 20 दिसंबर 2022: हाईकोर्ट ने अतिक्रमण हटाने के लिए नोटिस जारी किया।
  • मामला बाद में सुप्रीम कोर्ट में स्थानांतरित हो गया।
  • अब अगली तारीख की प्रतीक्षा
  • आज सुनवाई टलने के बाद अब अगली सुनवाई 10 दिसंबर को होगी, जिस पर पूरे राज्य की निगाहें टिकी हैं।