हल्द्वानी। अगर मौसम ने करवट न बदली तो सोमवार छह अक्टूबर की रात अमृतमयी चाँदनी बरसेगी। इस बार शरद पूर्णिमा का आगमन छह अक्टूबर सोमवार दोपहर 12:24 बजे होगा, जो सात अक्टूबर सुबह 9:17 बजे तक रहेगा। छह अक्टूबर की रात व्रतपूर्णिमा तथा सात अक्टूबर को स्नान-दानादि पूर्णिमा मनाई जाएगी।
ज्योतिषाचार्य अशोक वार्ष्णेय ने बताया कि आश्विन माह शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा वर्ष की बारह पूर्णिमाओं में सबसे महत्वपूर्ण होती है, क्योंकि इस दिन चन्द्रमा सोलह कलाओं से युक्त होकर अमृत वर्षा करता है। इस पूर्णिमा को कोजागरी, कमला तथा कौमुदी पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है।
धार्मिक मान्यता है कि इस रात चन्द्रमा का पूजन कर खीर का भोग लगाने से निरोगता प्राप्त होती है। खीर को पूरी रात सफेद कपड़े से ढक कर ऐसी जगह रखना चाहिए जहाँ चाँदनी की किरणें पड़ें, और सुबह प्रसाद के रूप में इसका सेवन करना चाहिए।
ज्योतिषाचार्य डॉ. गोपाल दत्त त्रिपाठी के अनुसार, जो श्रद्धालु इस रात जागरण कर भगवान विष्णु और महालक्ष्मी की पूजा कर दीप प्रज्ज्वलित करते हैं, उनके घर वर्षभर लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है। वहीं, पंडित तिलक कांडपाल का कहना है कि इस रात खीर और घी से हवन करने से धन की वृद्धि होती है।
विशेष समय
- चन्द्रोदय : शाम 5:19 बजे
- चन्द्र पूजन : रात्रि 11:45 से 12:34 बजे तक

