सलीम वास्तिक अटैक केस: एक नंबर से शुरू हुई जांच, मैनहंट के बाद पुलिस एनकाउंटर में ढेर हुए हमलावर

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गाजियाबाद के लोनी इलाके में यूट्यूबर और सोशल मीडिया एक्टिविस्ट सलीम वास्तिक पर हुआ जानलेवा हमला कुछ ही घंटों में राष्ट्रीय सुर्खियों में आ गया। दिनदहाड़े दफ्तर में घुसकर किए गए इस हमले ने न केवल इलाके में दहशत फैला दी, बल्कि सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में भी तीखी बहस छेड़ दी। पुलिस के लिए यह मामला बेहद संवेदनशील था, क्योंकि घटना सीसीटीवी में कैद हुई थी और हमलावर खुलेआम फरार हो गए थे।

लेकिन पुलिस की तेज तफ्तीश, तकनीकी सर्विलांस और बाइक के सिर्फ एक नंबर से मिले सुराग ने पूरे मामले को तेजी से सुलझा दिया। अंततः दोनों मुख्य आरोपियों का पुलिस मुठभेड़ में अंत हो गया।

कौन हैं सलीम वास्तिक

सलीम वास्तिक गाजियाबाद के लोनी क्षेत्र के रहने वाले एक यूट्यूबर, सोशल मीडिया एक्टिविस्ट और टीवी डिबेट पैनलिस्ट हैं। पिछले कुछ वर्षों में उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कई वीडियो बनाकर अपनी अलग पहचान बनाई।

सलीम खुद को “एक्स-मुस्लिम” बताते हैं और अपने वीडियो में धार्मिक मुद्दों, खासकर हलाला, तीन तलाक और कट्टरता जैसे विषयों पर खुलकर अपनी राय रखते रहे हैं। उनके वीडियो और बयान अक्सर विवाद का कारण बनते रहे और कई बार उन्हें सोशल मीडिया पर धमकियां भी मिली थीं।

उनके समर्थक उन्हें सामाजिक सुधार की आवाज बताते हैं, जबकि विरोधी उनके बयानों को भड़काऊ और विवादित मानते हैं। इसी वजह से सलीम लंबे समय से चर्चाओं और विवादों के केंद्र में बने हुए थे।

हमले वाले दिन क्या हुआ

घटना 27 फरवरी 2026 की बताई जाती है। उस दिन सुबह सलीम वास्तिक अपने लोनी स्थित कार्यालय में मौजूद थे। इसी दौरान दो युवक वहां पहुंचे और बातचीत करने के बहाने अंदर चले गए।

कुछ ही मिनट बाद दोनों ने अचानक धारदार हथियार निकाले और सलीम पर ताबड़तोड़ हमला कर दिया। हमलावरों ने चाकू से उनके गले, पेट और शरीर के कई हिस्सों पर वार किए। हमला इतना खतरनाक था कि वहां मौजूद लोग कुछ पल के लिए समझ ही नहीं पाए कि क्या हो रहा है।

घटना के बाद दोनों आरोपी तेजी से बाहर निकले और बाइक पर बैठकर फरार हो गए। पूरी वारदात वहां लगे सीसीटीवी कैमरों में रिकॉर्ड हो गई, जिसने बाद में पुलिस जांच में अहम भूमिका निभाई।

गंभीर रूप से घायल सलीम वास्तिक को तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उनका आपातकालीन ऑपरेशन किया। कई दिनों तक वे आईसीयू में भर्ती रहे और उनकी हालत नाजुक बनी रही।

पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती

हमले के बाद गाजियाबाद पुलिस के सामने सबसे बड़ा सवाल था कि हमलावर कौन हैं और वे कहां छिपे हैं। चूंकि आरोपी वारदात को अंजाम देकर तुरंत फरार हो गए थे, इसलिए शुरुआती जांच में कोई ठोस पहचान सामने नहीं आ रही थी।

पुलिस ने तुरंत इलाके की नाकाबंदी कराई और आसपास के सभी सीसीटीवी कैमरों की फुटेज इकट्ठा की। जांच टीम ने घंटों तक फुटेज को खंगाला और हर फ्रेम को बारीकी से देखा।

बाइक का ‘एक नंबर’ बना सबसे बड़ा सुराग

सीसीटीवी फुटेज में हमलावरों को बाइक पर भागते हुए देखा गया, लेकिन नंबर प्लेट पूरी तरह साफ नहीं दिख रही थी। फिर भी पुलिस की तकनीकी टीम को नंबर प्लेट का एक अंक स्पष्ट दिखाई दे गया। यह छोटा सा सुराग ही पूरे मामले में सबसे अहम साबित हुआ।

इसी एक अंक के आधार पर पुलिस ने हजारों वाहनों के डाटा की जांच शुरू की। आरटीओ रिकॉर्ड खंगाले गए और उन सभी बाइक नंबरों की सूची तैयार की गई जिनमें वही अंक मौजूद था।

इसके बाद पुलिस ने मोबाइल लोकेशन,  कॉल डिटेल रिकॉर्ड, सोशल मीडिया गतिविधि, मुखबिरों से मिली जानकारी को जोड़कर संदिग्धों की सूची को धीरे-धीरे छोटा किया।

जांच में सामने आए हमलावर

तफ्तीश आगे बढ़ने पर पुलिस को पता चला कि हमले में शामिल आरोपी जीशान और गुलफाम नाम के दो सगे भाई हैं।

जांच में यह भी सामने आया कि दोनों सलीम के वीडियो और उनके बयानों से नाराज थे। बताया गया कि धार्मिक मुद्दों पर सलीम द्वारा किए गए कुछ बयान उन्हें आपत्तिजनक लगे थे और इसी वजह से उन्होंने हमला करने की योजना बनाई। पुलिस के मुताबिक दोनों ने पहले से सलीम के दफ्तर की रेकी की थी और फिर मौका देखकर वारदात को अंजाम दिया।

शुरू हुआ पुलिस का मैनहंट

जैसे ही आरोपियों की पहचान सामने आई, पुलिस ने उनकी गिरफ्तारी के लिए कई टीमें गठित कर दीं।गाजियाबाद, दिल्ली और आसपास के इलाकों में मैनहंट ऑपरेशन शुरू किया गया। पुलिस को इनपुट मिला कि आरोपी लगातार अपनी लोकेशन बदल रहे हैं और छिपने की कोशिश कर रहे हैं। पुलिस ने उनके संभावित ठिकानों पर छापेमारी की और इलाके में घेराबंदी तेज कर दी।

कैसे हुआ एनकाउंटर

तलाश के दौरान पुलिस का सामना पहले आरोपी जीशान से हुआ। पुलिस के मुताबिक उसने गिरफ्तारी से बचने के लिए फायरिंग शुरू कर दी। पुलिस ने जवाबी कार्रवाई की, जिसमें जीशान गोली लगने से घायल हो गया। उसे अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

कुछ दिन बाद दूसरे आरोपी गुलफाम का भी पुलिस से सामना हो गया। इंदिरापुरम इलाके में हुई मुठभेड़ के दौरान उसने भी पुलिस पर फायरिंग की। जवाबी कार्रवाई में वह भी मारा गया।

इस पूरे घटनाक्रम ने कई सवाल खड़े किए 

  • सोशल मीडिया पर बढ़ते विवाद
  • धार्मिक मुद्दों पर तीखी बहस
  • और इन बहसों से पैदा होने वाला तनाव

लेकिन पुलिस के लिए सबसे अहम बात यह रही कि सीसीटीवी में दिखा बाइक का सिर्फ एक नंबर ही इतना बड़ा सुराग बन गया कि उसी से शुरू हुई जांच हमलावरों तक पहुंच गई।

गाजियाबाद में सलीम वास्तिक पर हुआ हमला केवल एक आपराधिक घटना नहीं था, बल्कि यह सोशल मीडिया विवादों और सामाजिक तनाव से जुड़ी बड़ी कहानी बन गया। हालांकि पुलिस की तेज तफ्तीश और तकनीकी जांच ने कुछ ही दिनों में मामले को सुलझा दिया और हमले में शामिल दोनों मुख्य आरोपियों का अंत पुलिस मुठभेड़ में हो गया।