पाकिस्तान-सऊदी रक्षा समझौता: सऊदी को मिला पाकिस्तानी परमाणु छत्र

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नई दिल्ली। पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच हाल ही में हुए रणनीतिक पारस्परिक रक्षा समझौते ने पाकिस्तान और मध्य पूर्व में हलचल मचा दी है। समझौते पर पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने हस्ताक्षर किए।

पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने कई इंटरव्यू में बताया कि यह समझौता किसी आक्रामक संधि का हिस्सा नहीं है। उन्होंने कहा, “यह एक अंब्रेला है, जिसमें किसी भी साइड से आक्रामण होने पर संयुक्त रूप से रक्षा की जाएगी। इसमें किसी देश का नाम नहीं लिया गया है।”

आसिफ ने स्पष्ट किया कि जरूरत पड़ने पर पाकिस्तान का परमाणु कार्यक्रम सऊदी अरब को उपलब्ध कराया जाएगा। उन्होंने कहा, “हमारे पास जो क्षमताएं हैं, वे निश्चित रूप से इस समझौते के अंतर्गत साझा की जाएंगी।” यह बयान पाकिस्तान के परमाणु हथियारों के तहत सऊदी अरब के ‘सुरक्षा छत्र’ की पुष्टि करता है।

विश्लेषकों का कहना है कि यह कदम इजरायल के लिए भी एक संदेश है। समझौते की टाइमिंग विशेष रूप से कतर में हमास नेताओं पर हालिया इजरायली हमले के बाद हुई, जिसने खाड़ी देशों में सुरक्षा चिंताओं को बढ़ा दिया है।

ख्वाजा आसिफ ने बताया कि इस समझौते में अन्य अरब देश भी शामिल हो सकते हैं और किसी भी मुस्लिम देश के लिए दरवाजे खुले हैं। उन्होंने कहा, “मुस्लिम आबादी का यह मौलिक अधिकार है कि वे मिलकर अपने क्षेत्र और राष्ट्रों की रक्षा करें।”

सऊदी अरब का पाकिस्तान के परमाणु कार्यक्रम में वित्तीय सहयोग पुराना है। इसके जरिए पाकिस्तान को अपने बैलिस्टिक मिसाइल और परमाणु कार्यक्रम को जारी रखने में मदद मिली है।