हल्द्वानी। डोनाल्ड ट्रंप के भारत की अर्थव्यवस्था को डेड इकोनामी बताने से आहत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति का फोन उठाने से मना कर दिया। जर्मन अखबार फ्रैंकफर्टर ऑलगेमाइन (FAZ) की रिपोर्ट ने यह दावा किया है। हालांकि सरकारी सूत्रों ने इस रिपोर्ट को खारिज किया है।
डोनाल्ड ट्रंप के इस बयान के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने 10 अगस्त को बिना नाम लिए पलटवार किया था। उन्होंने कहा था कि भारत दुनिया की तीन शीर्ष अर्थव्यवस्था में शामिल होने की ओर बढ़ रहा है। (FAZ) अखबार की रिपोर्ट के मुताबिक प्रधानमंत्री की ओर से फोन उठाए जाने की घटना उनके गुस्से और सतर्कता दोनों को दर्शाती है। अमेरिका द्वारा भारत पर 50% ट्रैफिक लगाया गया था, जिसके बाद प्रधानमंत्री मोदी से राष्ट्रपति ट्रंप ने बात करने की कोशिश थी। (FAZ) का दावा है कि ट्रंप ने हाल के हफ्तों में प्रधानमंत्री मोदी को चार बार फोन किए, लेकिन मोदी ने कॉल रिसीव करने से इनकार कर दिया।
बर्लिन स्थित ग्लोबल पब्लिक पॉलिसी इंस्टिट्यूट के सह-संस्थापक और निदेशक थॉर्स्टन बेनर ने एक्स (X) पर जर्मन अखबार की रिपोर्ट को शेयर किया है। इसके मुताबिक राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे देशों की अमेरिकी बाजार पर निर्भरता का फ़ायदा उठाने के तरीके का प्रधानमंत्री मोदी ने ट्रंप के पहले कार्यकाल में इसका विरोध किया था। मोदी ने ट्रंप के साथ सहयोगी संबंध बनाए रखते हुए भारत के आर्थिक हितों से कोई समझौता नहीं किया।
अखबार के मुताबिक भारत में ट्रंप की निर्माण परियोजनाएं भी विवाद का कारण बनी हैं। दिल्ली के पास ट्रंप परिवार की कंपनी ने उनके नाम पर लग्जरी टावर बनाए हैं। इन टावरों में मौजूद 300 अपार्टमेंट, जिनकी कीमत 12 मिलियन यूरो तक थी, मई के मध्य में एक ही दिन में बिक गए।
पिछले 25 सालों से संजोए गए भारत-अमेरिका संबंधों में खटास उस समय आई जब राष्ट्रपति ट्रंप ने भारत को ट्रेड सरप्लस होने पर निशाना बनाया। इसके अलावा, अमेरिका ने रूस से कच्चा तेल खरीदने के लिए भी भारत पर पेनल्टी लगा दी।

