नैनीताल जिला पंचायत अध्यक्ष पद बनाम धनबल और बाहुबल

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हल्द्वानी। उत्तराखंड के इतिहास में शायद ऐसा पहली बार हुआ है जब जिला पंचायत अध्यक्ष का पद वर्चस्व की लड़ाई बन गई है। सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों अपने दावेदारों के समर्थन में अमर्यादित राजनीति पर उतर आए हैं। कार्यकर्ताओं से साथ ही कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं को भी पुलिस प्रशासन की हाथापाई का सामना करना पड़ा। इससे आहत नेताओं को अभद्र टिप्पणी का सहारा लेना पड़ गया। विडंबना यह है कि राजनीति के युग पुरुष स्वर्गीय लाल बहादुर शास्त्री और अटल बिहारी वाजपेई के आदर्शों की बात करने वाली पार्टियां अब निरंकुश्ता पर उतर आई हैं। वहीं आला अधिकारी जिम्मेदारों को छोड़कर अन्य पर कार्रवाई की जिम्मेदारी पुरी कर रहे हैं।

लालच, डर अथवा बहकावे वश जहां एक और बाहुबलियों से पैसे लेना कुछ नेताओं को महंगा पड़ा है, वहीं दूसरी ओर नैनीताल जिला पंचायत अध्यक्ष की सीट पर वोट के बदले नोट की चर्चाएं अब पूरे देश में चल रही हैं। मोटी रकम लेकर भूमिगत होने वाले नेताओं के कभी अपहरण तो कभी घूमने की बात सामने आ रही है। धनबल और बाहुबल की इस राजनीति में पुलिस और प्रशासन मात्र मूकदर्शक बनने का काम कर रहा है। हाईकोर्ट के हथौड़े की चोट पर शांत हुए मुद्दे से सोमवार को फिर से नैनीताल की शांतवादियों में अशांति के आसार हैं। 

इधर नैनीताल जनपद के बेतालघाट ब्लॉक में गोली चलाने की घटना के बाद क्षेत्राधिकारी (सीओ) भवाली के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई और थानाध्यक्ष बेतालघाट अनीश अहमद को निलंबित करने का आदेश जारी किया गया है।

बता दें कि 14 अगस्त को बेतालघाट में फायरिंग हुई थी। ब्लॉक प्रमुख और उप प्रमुख के चुनाव के दौरान में एक पक्ष द्वारा गोलीबारी करने की घटना का वीडियो सोशियल मीडिया में तेजी से वायरल हो गया था। इस वीडियो के बाद प्रदेश के साथ देशभर में चुनाव के दौरान उत्तराखंड की न्याय व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े होने लगे थे। इसी दौरान, 16 अगस्त को जारी राज्य निर्वाचन आयोग के संयुक्त सचिव कमलेश मेहता के हस्ताक्षरों वाले पत्र ने खलबली मच दी। पत्र में सीओ भवाली प्रमोद साह के खिलाफ मामले की गंभीरता को देखते हुए विभागीय कार्यवाही और थानाध्यक्ष बेतालघाट अनीश अहमद को निलंबित करने की संस्तुति राज्य सरकार को दी गई है।