होर्मुज स्ट्रेट से गाजा तक बढ़ा सैन्य तनाव, ईरान ने अमेरिकी ड्रोन मार गिराने का दावा किया तो इजरायल ने हमास के नए सैन्य प्रमुख को निशाना बनाने का किया ऐलान
नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में शांति और युद्धविराम की कोशिशों के बीच एक बार फिर बारूद की गंध तेज हो गई है। एक ओर अमेरिका ने ईरान के रणनीतिक बंदर अब्बास क्षेत्र के आसपास सैन्य कार्रवाई कर क्षेत्रीय तनाव बढ़ा दिया है, तो दूसरी ओर इजरायल ने गाजा में हमास की सैन्य शाखा के नए प्रमुख मोहम्मद ओदेह को निशाना बनाने का दावा किया है। इन घटनाओं ने पूरे मिडिल ईस्ट को नए संकट के मुहाने पर ला खड़ा किया है।
अमेरिका का कहना है कि होर्मुज स्ट्रेट के पास की गई कार्रवाई समुद्री मार्गों की सुरक्षा और संभावित खतरों को रोकने के लिए थी, लेकिन ईरान ने इसे सीधे तौर पर संघर्षविराम का उल्लंघन बताया है। तेहरान ने दावा किया कि उसकी वायु रक्षा प्रणाली ने एक अमेरिकी MQ-9 ड्रोन को मार गिराया और अमेरिकी F-35 लड़ाकू विमान को पीछे हटने पर मजबूर कर दिया। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी तक नहीं हो सकी है।
उधर गाजा में इजरायली सेना ने हमास की सैन्य शाखा अल-कसम ब्रिगेड के नए प्रमुख मोहम्मद ओदेह पर बड़ा हमला किया है। इजरायल का आरोप है कि ओदेह वर्ष 2023 के 7 अक्टूबर हमले की रणनीति बनाने वालों में शामिल था। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने दोहराया कि हमास के शीर्ष नेतृत्व के खिलाफ अभियान तब तक जारी रहेगा, जब तक सभी जिम्मेदार लोगों को खत्म नहीं कर दिया जाता।
गाजा में जारी हमलों के बीच नागरिक हताहतों की संख्या भी लगातार बढ़ रही है। वहीं लेबनान में हिजबुल्लाह के ठिकानों पर इजरायली हमले तेज होने से संघर्ष का दायरा और व्यापक होता दिखाई दे रहा है। इजरायल का कहना है कि वह उत्तरी सीमा पर किसी भी खतरे को बर्दाश्त नहीं करेगा।
इस बीच अमेरिका और ईरान के बीच संभावित समझौते तथा होर्मुज स्ट्रेट में सामान्य जहाजरानी बहाल करने की बातचीत पर भी संकट के बादल मंडराने लगे हैं। दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत तेल व्यापार का रास्ता इसी समुद्री मार्ग से गुजरता है। बढ़ते तनाव के कारण वैश्विक बाजारों में चिंता बढ़ गई है और कच्चे तेल की कीमतों में भी तेजी देखने को मिल रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अमेरिका, ईरान और इजरायल के बीच मौजूदा टकराव और बढ़ा तो इसका असर केवल पश्चिम एशिया तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था, ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा पर भी पड़ सकता है। ऐसे में दुनिया की निगाहें अब इस बात पर टिकी हैं कि शांति वार्ता आगे बढ़ती है या मिडिल ईस्ट एक और बड़े संघर्ष की ओर बढ़ता है।

