“न्याय के इंतज़ार में एक और किसान हार गया”

Spread the love

हल्द्वानी। शहर के एक होटल में काशीपुर के किसान सुखवंत सिंह की आत्महत्या केवल एक दुखद घटना नहीं, बल्कि उस व्यवस्था की गहरी विफलता है, जिस पर आम आदमी सबसे अधिक भरोसा करता है। आत्महत्या से पहले जारी वीडियो में लगाए गए आरोप यह सोचने पर मजबूर करते हैं कि क्या आज भी न्याय हर व्यक्ति की पहुंच में है?

एक किसान, जिसकी पहचान उसकी जमीन और मेहनत से होती है, यदि धोखाधड़ी का शिकार होकर न्याय की तलाश में दर-दर भटकता रहे और अंततः जीवन समाप्त कर ले—तो यह केवल व्यक्तिगत त्रासदी नहीं, बल्कि सामाजिक चेतावनी है। वीडियो में पुलिस अधिकारियों और प्रॉपर्टी डीलरों पर लगाए गए आरोप यदि सही साबित होते हैं, तो यह कानून व्यवस्था पर बेहद गंभीर प्रश्न खड़े करते हैं।

विडंबना यह है कि जिस तंत्र का काम पीड़ित को संरक्षण देना है, वही यदि उसकी पीड़ा का कारण बन जाए, तो भरोसा टूटना स्वाभाविक है। न्याय में देरी और संवेदनहीनता कई बार अपराध से भी ज्यादा घातक साबित होती है। सुखवंत सिंह की मौत इसका उदाहरण है।

मुख्यमंत्री द्वारा मजिस्ट्रेट जांच के आदेश स्वागतयोग्य हैं, लेकिन उत्तराखंड की जनता अब केवल जांच नहीं, बल्कि ठोस परिणाम चाहती है। दोषी चाहे कितने भी प्रभावशाली क्यों न हों, उन्हें कानून के कटघरे में लाना ही इस मामले में सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

यह घटना एक बार फिर याद दिलाती है कि किसान केवल अन्नदाता नहीं, बल्कि व्यवस्था की संवेदनशीलता की कसौटी भी है। यदि समय रहते न्याय मिलता, तो शायद एक परिवार उजड़ने से बच जाता। अब सवाल यह नहीं है कि क्या हुआ, बल्कि यह है कि आगे ऐसा दोबारा न हो—इसके लिए सिस्टम क्या बदलेगा?

सीएम ने दिए मजिस्ट्रेट जांच के आदेश

नैनीताल जिले के काठगोदाम थाना क्षेत्र स्थित गौलापार के एक निजी होटल में काशीपुर निवासी किसान सुखवंत (सुखदेव) सिंह द्वारा आत्महत्या किए जाने से पूरे प्रदेश में हड़कंप मच गया है। आत्महत्या से पहले किसान द्वारा बनाया गया वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया है, जिसमें उसने प्रॉपर्टी डीलरों और उधम सिंह नगर पुलिस के कुछ अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं।

बताया जा रहा है कि सुखवंत सिंह करीब 4 करोड़ रुपये की कथित जमीन धोखाधड़ी के बाद लंबे समय से मानसिक तनाव में थे। घटना के समय वह पत्नी और बेटे के साथ होटल में ठहरे हुए थे। देर रात गोली चलने की आवाज आई, जिसके बाद उन्हें खून से लथपथ हालत में पाया गया। सूचना पर काठगोदाम पुलिस मौके पर पहुंची और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया।

नैनीताल एसएसपी मंजूनाथ टीसी ने बताया कि सुसाइड नोट और वीडियो को साक्ष्य के तौर पर कब्जे में ले लिया गया है। मृतक की पत्नी और बेटे के बयान दर्ज कर लिए गए हैं। परिजनों की तहरीर के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

शव जब काशीपुर पहुंचा तो परिजनों और किसानों में कोहराम मच गया। बड़ी संख्या में किसान मृतक के घर पहुंचे और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। परिजनों ने चेतावनी दी कि तय समय में कार्रवाई न होने पर बड़ा आंदोलन किया जाएगा।

मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दिए हैं। जांच की जिम्मेदारी कुमाऊं कमिश्नर दीपक रावत को सौंपी गई है। सीएम ने निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। वहीं कांग्रेस ने इस मामले को लेकर सरकार और पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं।