हल्द्वानी। शहर में यातायात व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के लिए प्रशासन की ओर से एक करोड़ की लागत से ट्रैफिक लाइट लगाई गई थी। आलम यह है कि इससे यातायात व्यवस्था पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा, लेकिन ट्रैफिक लाइट सड़क चौड़ीकरण के जद में जरूर आ गई। कुसुमखेड़ा, गैस गोदाम चौराहा, लालडांठ सहित ऐसे कई क्षेत्र हैं जहां से ट्रैफिक लाइट हैं हटा दी गई हैं। शहर में 13 जगह ट्रैफिक लाइट लगाने के बाद भी जाम की समस्या अभी भी बनी हुई है।

कालाढूंगी रोड के सबसे व्यस्ततम मुखानी चौराहे में लोग रोजाना ट्रैफिक की समस्या से जूझ रहे हैं। हालांकि पुलिस प्रशासन की ओर से यातायात को व्यवस्थित रखने के लिए दो से तीन पुलिस कर्मियों की तैनाती की जा रही है, लेकिन वाहनों के बढ़ते दबाव के चलते उनके भी पसीने छूट जा रहे हैं। दिलचस्प बात यह है कि हेलमेट न पहनने पर ₹500 का चालान काटने वाली सीपीयू को वहां पर अवैध रूप से खड़े वाहन नहीं दिखाई नहीं दे रहे हैं।

जाम के चलते मुखानी चौराहे से गुजरने वाले लोगों को रोजाना परेशानी उठानी पड़ रही है। कदाचित कभी कोई एंबुलेंस भी यहां से गुजरती है तो उसे भी जाम का सामना करना पड़ता है। इससे न केवल मरीज की जान को खतरा बना रहता है बल्कि वहां मौजूद लोगों को एंबुलेंस की आवाज से परेशानी भी होती है। यह समस्या तब और अधिक बढ़ जाती है जब छुट्टी होने के बाद स्कूल की बस है वहां से गुजरती हैं।

छोटे दुकानदारों निम्न वर्ग के लोगों पर प्रभाव दिखाने वाला पुलिस प्रशासन वहां मौजूद अस्पतालों और बैंकों के बाहर से अवैध रूप खड़े वाहनों पर कोई कार्रवाई नहीं कर रही है जिसके कारण मुखानी चौराहा अब जाम चौराहा बन चुका है।

